भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का सेतु : द्वारिकाधीश जी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित कबीर आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री द्वारिकाधीश जी महाराज ने अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का श्रवण कराते हुए भक्तों को भक्ति, श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण का संदेश दिया।कथा के प्रथम दिन महाराज श्री ने एक प्रेरणादायक दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि एक बार एक साधारण भक्त ने निष्कपट भाव से भगवान का स्मरण किया। उसके पास न धन था, न वैभव और न ही किसी प्रकार का बाहरी आडंबर, किन्तु उसकी सच्ची श्रद्धा और अटूट भक्ति ने भगवान को उसके समीप आने के लिए विवश कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि ईश्वर को पाने के लिए बाहरी साधनों से अधिक आवश्यक शुद्ध हृदय, सच्ची आस्था और निष्काम भक्ति है।उन्होंने कहा कि भक्ति ही वह सेतु है जो आस्था का निर्माण कर मनुष्य को भगवान से मिला देती है। जब मनुष्य अपने अहंकार, लोभ और मोह को त्यागकर प्रभु की शरण ग्रहण करता है, तब उसके जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश का उदय होता है। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है।इस अवसर पर कथा आयोजन से जुड़े श्री नील भाई ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा मनुष्य धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होता है। कथा स्थल पर भजनों और संकीर्तन की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा श्रद्धालु कथा श्रवण कर भाव-विभोर हो उठे। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में भाग लेकर सुख, शांति एवं लोककल्याण की प्रार्थना की। सम्पूर्ण आश्रम परिसर भक्तिरस और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।

Related Articles

Back to top button