श्रीमद् भागवत धर्म के मार्ग पर चलाने वाली पुण्य रूपी पावन गंगा है कथा व्यास भरत पांडेय जी हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध ललिता आश्रम में परम श्रद्धेय कथा व्यास श्री भरत पांडेय जी के श्रीमुख से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। अनेक दिनों से चल रही इस दिव्य कथा में श्रद्धालुजन निरंतर भगवान की अमृतमयी लीलाओं का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना रहे थे। कथा पंडाल में प्रतिदिन भक्ति, श्रद्धा और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना रहा।कथा के अंतिम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोकुल की पावन झांकियों तथा वृंदावन की अनुपम छटाओं का अत्यंत मनोहारी एवं जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया। मनोहारी झांकियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कहीं नंदलाल की मधुर बाल लीलाएं दिखाई दीं तो कहीं वृंदावन की रासमयी भक्ति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों के साथ भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।
कथा समापन के अवसर पर सुंदर पुष्प सज्जा, आकर्षक दीप श्रृंगार एवं भक्ति संगीत की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को और अधिक अलौकिक बना दिया। कथा व्यास श्री भारत जी ने अपने पावन उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलाने वाली दिव्य गंगा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा एवं प्रेम से भगवान की कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन के समस्त दुःख दूर होकर अंतःकरण में शांति और आनंद का संचार होता है।समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भगवान की आरती में सहभाग किया तथा प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा।


