देवभूमि योग पीठ है में प्रवाहित हो रही गौभक्ति की पावन गंगा हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद श्यामपुर कांगड़ी गाजीवाला आर्य नगर स्थित देवभूमि योग पीठ में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। कथा व्यास प्रातःस्मरणीय गुरुदेव परमात्मा स्वरुपपरम पूज्य स्वामी प्रेम तीर्थ जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही “गौ कथा निर्झरणी” का अमृतमय श्रवण कर श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ अनुभव कर रहे हैं।पूज्य महाराज श्री अपनी मधुर, ओजपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी वाणी में गौमाता की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, धर्म और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं। गौमाता में समस्त देवी-देवताओं का निवास माना गया है तथा उनकी सेवा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान जब पूज्य महाराज श्री गौमाता के वात्सल्य, करुणा और त्याग का वर्णन करते हैं, तब अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भावविभोर होकर सजल हो उठती हैं।कथा स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति बनी हुई है। संपूर्ण वातावरण गौभक्ति, भजन-कीर्तन एवं जयघोषों से भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु कथा श्रवण कर अपने जीवन में गौसेवा, धर्म, संस्कार और मानवता को अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। कथा का प्रत्येक प्रसंग भक्तों के अंतर्मन को भक्ति रस से सराबोर कर रहा है।पूज्य महाराज श्री ने कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि जिस समाज में गौमाता का सम्मान और संरक्षण होता है, वहां सदैव सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा का भी महान माध्यम है।इस अवसर पर पूज्य महाराज श्री द्वारा उद्धृत यह संस्कृत श्लोक श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष श्रद्धा जागृत कर रहा है—

“गावो विश्वस्य मातरः।”

अर्थात — गौमाता सम्पूर्ण विश्व की माता हैं।निस्संदेह, यह पावन “गौ कथा निर्झरणी” श्रद्धालुओं के जीवन में आध्यात्मिक जागरण, भक्ति और संस्कारों की अमृतधारा प्रवाहित कर रही है। इस अवसर पर स्वामी बलराम मुनि जी महाराज ने कहा हमारी गाय माता में करोड़ देवी देवताओं का वास है अगर प्रातः ही मनुष्य को गाय माता के दर्शन हो जाते हैं तो मानो उसका दिन सार्थक हो गया जिसके घर से गाय माता को पहली रोटी निकल जाती है उसके घर में कभी कष्ट संताप नहीं आते जहां गंगाजल नहीं है वहां आप गौ माता के मूत्र का उपयोग गंगाजल के रूप में कर सकते हैं पांच अमृत में भी पावन गोमूत्र का उपयोग होता है गोमूत्र गंगाजल की तरह पावन है तथा कल्याणकारी है

Related Articles

Back to top button