प्रातः स्मरणीय योगेश्वरानन्द स्वामी जगदीश जी महाराज ने मानव जीवन में ज्ञान के महत्व पर अत्यंत प्रेरणादायक उद्बोधन दिया।

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद हरिपुर स्थित दीप्ति कुटीर आनंदवन आश्रम निकट गीता कुटीर में आज ज्ञान की अनंत वर्षा करते हुए आश्रम के श्री महंत संचालक प्रातः स्मरणीय योगेश्वरानन्द स्वामी जगदीश जी महाराज ने मानव जीवन में ज्ञान के महत्व पर अत्यंत प्रेरणादायक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के पास ज्ञान एक ऐसी अमूल्य निधि है, जिसे न तो कोई छीन सकता है और न ही कोई बांट सकता है। संसार में अर्जित धन-संपत्ति को कोई छीन सकता है, उसका बंटवारा हो सकता है, किंतु जीवन में अर्जित किया गया ज्ञान सदैव मनुष्य के साथ रहता है। यह ऐसी दिव्य पूंजी है, जो जीवन को दिशा, विवेक और सार्थकता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान जितना अधिक प्राप्त किया जाए, उतना ही कम प्रतीत होता है, क्योंकि ज्ञान का सागर असीम है और इसे प्राप्त करने की कोई आयु नहीं होती। स्वामी जी महाराज ने आगे कहा कि सच्चा ज्ञान हमें हमारे आध्यात्मिक गुरुजनों से प्राप्त होता है। गुरु ही जीवन के पथप्रदर्शक, अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने वाले और भवसागर से तारने वाले होते हैं। उन्होंने कहा, “सतगुरु तारनहार हैं, सतगुरु ही मेरे राम हैं।” जो भक्त गुरु की शरणागत हो जाते हैं, उनका मानव जीवन धन्य और सार्थक हो जाता है। गुरुजनों की संगति बड़े सौभाग्य से प्राप्त होती है और यही संगति मनुष्य के जीवन को धर्म, कर्म और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि धर्म और कर्म मनुष्य के जीवन का उद्धार कर देते हैं, जबकि गुरु के वचन इस मानव जीवन को पूर्ण रूप से सार्थक बना देते हैं। आश्रम में उपस्थित श्रद्धालु स्वामी जी के ज्ञानामृत से भावविभोर हो उठे और वातावरण भक्ति, श्रद्धा तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। यह सत्संग सभी भक्तों के लिए जीवन में प्रेरणा, सद्बुद्धि और आत्मिक उन्नति का संदेश लेकर आया।




