भगवान श्री राम ने माता दुर्गा की आराधना रावण से युद्ध में विजय पाने हेतु की थी श्री महंत सूरज दास महाराज

हरिद्वार 28 सितंबर (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद ) सिद्ध संकट मोचन श्री हनुमान मंदिर सीताराम धाम में भक्तजनों के बीच श्री महंत परम पूज्य सूरज दास महाराज ने कहा हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने रावण के साथ होने वाले युद्ध में विजय पाने हेतु माता दुर्गा की आराधना की थी माता ने प्रसन्न होकर उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद दिया था सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम ने स्वयं भी आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना की थी। यद्यपि श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, फिर भी उन्होंने यह दिखाने के लिए कि मानव जीवन में शक्ति के बिना कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता, देवी माँ की उपासना की। श्री महंत सूरज दास महाराज ने बताया
लंका विजय से पहले जब भगवान श्रीराम वानर-सेना सहित समुद्र तट पर पहुँचे, तब उन्हें रावण से युद्ध करना था। रावण अत्यंत पराक्रमी, बलवान और अनेक वरदानों से संपन्न था। ऐसे समय में श्रीराम ने समझा कि केवल पराक्रम से रावण का संहार करना कठिन है। विजय प्राप्त करने के लिए शक्ति की आवश्यकता है और वह शक्ति माँ दुर्गा के आशीर्वाद से ही संभव है।
भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर शरद ऋतु में नव दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा की। उन्होंने एक सौ आठ कमल अर्पित करने का संकल्प लिया। परंतु जब एक कमल की कमी हो गई, तब श्रीराम ने अपने भक्तिभाव से यह निश्चय किया कि वे अपनी कमल-सी नेत्र को माँ को अर्पित कर देंगे। यह देखकर माँ दुर्गा प्रसन्न हो गईं और उन्होंने प्रकट होकर श्रीराम को आशीर्वाद दिया
“राम! तुम धर्म और मर्यादा के प्रतीक हो। तुम्हारी विजय निश्चित है। रावण का अंत होगा और धर्म की स्थापना होगी।” श्री महंत सूरज दास महाराज ने कहा
इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि स्वयं भगवान भी शक्ति और भक्ति का महत्व स्वीकार करते हैं।
विजयादशमी और नवरात्रि का पर्व इसी प्रसंग से जुड़ा हुआ है। नवरात्र के नौ दिन देवी की उपासना कर दशमी को विजय प्राप्ति का उत्सव मनाया जाता है।
यह घटना हमें यह भी बताती है कि सच्चे समर्पण और आस्था से ही दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
भगवान श्रीराम की देवी दुर्गा के प्रति आराधना मानवता के लिए एक महान संदेश है। यह केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है कि बिना शक्ति के धर्म की रक्षा संभव नहीं। शक्ति ही सृजन, पालन और संहार का आधार है। श्रीराम ने माँ दुर्गा की उपासना कर हमें सिखाया कि चाहे कितने भी बलवान शत्रु क्यों न हों, सच्ची आस्था और देवी की कृपा से विजय निश्चित होती है।





