मनुष्य का मन जितना शांत होता है ब्रह्म का दर्शन भी उतना ही स्पष्ट होता है श्री श्री आनंदमयी साधना मां हरिद्वार

हरिद्वार कनखल दक्ष रोड स्थित श्री माधव आश्रम श्री श्री आनंदमयी कविता मां आश्रम की परमाध्यक्ष प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री आनंदमयी साधना मां ने कहा मनुष्य का मन जितना एकांत चित होगा और शांत होगा मन में धिरता और एकाग्रता होगी ब्रह्म का दर्शन भी उतना ही आसान और स्पष्ट होगा क्योंकि अधीर मन कभी भी भगवान का सिमरन एकांत चित मन से नहीं कर सकता इसलिए मन का शांत होना और एकाग्रता होना नितांत आवश्यक है साधना से समाधि तक का सफर ग्रहस्थ आश्रम से होकर जाता है और गृहस्थ के बिना कोई भी आश्रम परिपूर्ण नहीं हो सकता सभी आश्रमों तथा धर्म का संचालन ग्रहस्थ से होकर जाता है गृहस्थ सभी में श्रेष्ठ है इसका मार्गदर्शक गुरु होता है जो उन्हें समय-समय पर मार्गदर्शित करते हुए सत्य का मार्ग दिखाते हैं


