श्रीमद्भागवत एवं भक्तमाल कथा के प्रथम दिवस में उमड़ा भक्ति का सागर हरिद्वार


हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध जयपुरिया धर्मशाला में राजस्थान से पधारे राधे रानी सत्संग मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं भक्तमाल कथा के प्रथम दिवस पर श्रद्धालु भक्तजन भक्ति रस में सराबोर हो गए। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय श्री विपुल जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं मधुर प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान का अमृतपान कराया। प्रातःकालीन सत्र में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के पापों का क्षय होता है तथा जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। उन्होंने नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों द्वारा सूत जी महाराज से कलियुग में प्राणियों के कल्याण के उपाय पूछने तथा श्रीमद्भागवत महापुराण के प्राकट्य का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान के नाम-स्मरण, सत्संग और संतों की सेवा के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। संध्याकालीन सत्र में भक्तमाल कथा का रसपान कराते हुए श्री विपुल जी महाराज ने संतों और भक्तों के जीवन चरित्रों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भक्तमाल में वर्णित संतों का जीवन त्याग, तपस्या, समर्पण और ईश्वर प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। सच्चे भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण नहीं छोड़ते और उनकी अटूट श्रद्धा ही उन्हें भगवान की विशेष कृपा का पात्र बनाती है। संतों की महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे तथा भजन-कीर्तन में झूमते हुए भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री गोपाल लाल गुप्ता, श्री मनोज, श्री रमाशंकर जी, श्री शोभित खंडेलवाल, श्री रितेश सिंघल, श्री कृष्णा खंडेलवाल, श्री मनोज खंडेलवाल, श्री संतोष गुप्ता सहित राजस्थान से पधारे सैकड़ों श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बताया। कथा के उपरांत आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ प्रथम दिवस का कार्यक्रम संपन्न हुआ।





