भक्ति और मन ही भगवान श्री राम को प्राप्त करने का माध्यम है

हरिद्वार की पुण्यभूमि, सप्त सरोवर रोड स्थित श्री हनुमान गुफा में आज का दिन अत्यंत दिव्य, आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण रहा, जहाँ महामंडलेश्वर ज्ञान मूर्ति 1008 श्री महंत श्याम दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से अमृतमयी वाणी का प्रवाह करते हुए श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। आश्रम परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी, और भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा हुआ प्रतीत हो रहा था। जैसे ही महाराज श्री ने अपने प्रवचन आरंभ किए, वहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति मानो आत्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव करने लगा।अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में महाराज श्री ने अत्यंत सरल किन्तु गूढ़ शब्दों में कहा कि जिस मनुष्य के हृदय में भगवान राम की सच्ची भक्ति का दीप प्रज्वलित हो जाता है, उसके जीवन में अज्ञान का अंधकार स्वतः ही समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि भक्ति केवल बाहरी आडंबर या दिखावे का विषय नहीं है, बल्कि यह हृदय की गहराइयों से उत्पन्न होने वाली एक पवित्र अनुभूति है, जो मनुष्य को भीतर से निर्मल और पवित्र बना देती है। जब किसी के अंतःकरण में दूसरों के प्रति दया, करुणा और सहानुभूति का भाव जागृत होता है, तब वही भाव उसे सच्चे अर्थों में मानव बनाता है और उसे ईश्वर के सान्निध्य की ओर अग्रसर करता है।
महाराज श्री ने आगे कहा कि जीवन में सच्चा आनंद और शांति तभी प्राप्त होती है जब मनुष्य अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर सेवा और परोपकार का मार्ग अपनाता है। उन्होंने समझाया कि जब हृदय में भक्ति का आनंद लेने की तीव्र आकांक्षा हिलोरे मारती है, तब वह व्यक्ति संसार के मोह-माया के बंधनों से धीरे-धीरे मुक्त होने लगता है और उसका जीवन हरि कृपा से धन्य और सार्थक हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर की कृपा किसी विशेष व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस प्रत्येक व्यक्ति पर होती है जो सच्चे मन, निष्काम भाव और श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करता है और अपने जीवन में सदाचार को अपनाता हैइस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और प्रभु नाम संकीर्तन के माध्यम से वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। भक्तों की आंखों में भक्ति भाव के आँसू और चेहरे पर अद्भुत शांति स्पष्ट झलक रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सम्पूर्ण वातावरण ईश्वरमय हो गया हो और हर हृदय में प्रभु के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना जागृत हो रही हो। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने प्रभु से अपने जीवन में भक्ति, सेवा और सद्गुणों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त की और इस दिव्य सत्संग को अपने जीवन का अमूल्य अनुभव बताया। भक्ति और मन ही श्री राम को प्राप्त करने का माध्यम है अगर मन में राम बसे हैं और हृदय में भक्ति बसी है तो भगवान राम एक दिन जरुर मिलेंगे




