भगवान श्री राम के नाम की महिमा बड़ी ही अपरम्पार है सनातन ध्वजा सहित सद्भावना पदयात्रा 26 दिसंबर से आरंभ होकर 28 दिसंबर तक दिल्ली पहुंचेगी हरिद्वार

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द)श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम के परमाध्यक्ष प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री श्याम सुंदर महाराज के पतित पावन सानिध्य में उनके मार्गदर्शन अनुसार ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 गुरु भगवानपंडित राम गोपाल शर्मा जी अलवर वाले बाबा के पैतृक धाम भूगोर अलवर 26 दिसंबर को यात्रा शुरू होकर 28 दिसंबर को पावन धाम हनुमान मंदिर बालाजी मंदिर सभापुर दिल्ली पहुंचेगी सभी भक्तजन इस पावन शोभायात्रा में सम्मिलित होकर धर्म का लाभ उठाएं अपने श्रीमुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री महंत परम पूज्य श्याम सुंदर महाराज ने कहा श्री राम नाम की महिमा अपार, असीम और अनिर्वचनीय है। यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति है, जो संसार रूपी भवसागर से पार उतारने वाली नौका के समान है। मानव जीवन दुख, मोह, माया, अहंकार और कर्मों के बंधनों से घिरा रहता है। इन सबके बीच यदि कोई सहारा है जो सहज, सरल और सर्वसुलभ है, तो वह है राम नाम का स्मरण। शास्त्रों में कहा गया है कि जहाँ ज्ञान कठिन हो जाए और कर्म मार्ग बोझिल लगने लगे, वहाँ राम नाम का जप स्वतः ही आत्मा को शांति और मुक्ति की ओर ले जाता है। राम नाम का प्रभाव मन, बुद्धि और आत्मा – तीनों पर पड़ता है। जब मन राम नाम में लीन होता है, तो उसमें उठने वाले विकार शांत हो जाते हैं। क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या जैसे दोष धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। राम नाम का निरंतर स्मरण मनुष्य को धैर्य, करुणा और विनम्रता से भर देता है। यह नाम साधक को उसके कर्तव्यों से विमुख नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक पवित्र भाव से कर्म करने की प्रेरणा देता है। भवसागर को संसार के अनंत जन्म-मरण के चक्र के रूप में देखा गया है, जिसमें मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार डूबता-उतराता रहता है। इस अथाह सागर को पार करना केवल अपनी बुद्धि या बल से संभव नहीं, किंतु राम नाम की कृपा से यह कार्य सुगम हो जाता है। जैसे एक छोटी सी नाव विशाल समुद्र को पार करा देती है, उसी प्रकार राम नाम का सहारा मनुष्य को भवबंधन से मुक्त कर देता है। संतों और भक्तों ने अनुभव किया है कि राम नाम में ऐसी शक्ति है जो असंभव को भी संभव बना देती है। राम नाम का सबसे बड़ा सौंदर्य उसकी सरलता है। न इसके लिए विशेष समय चाहिए, न स्थान, न ही कोई बाहरी साधन। चलते-फिरते, उठते-बैठते, सुख-दुख हर अवस्था में इसका स्मरण किया जा सकता है। यह नाम एक ऐसा मंत्र है जो बिना उच्चारण के भी हृदय में गूंजता रहता है। जब यह नाम हृदय में बस जाता है, तब जीवन की कठिनाइयाँ भी साधक को विचलित नहीं कर पातीं।राम नाम मनुष्य को केवल मोक्ष की दिशा में ही नहीं ले जाता, बल्कि उसे एक श्रेष्ठ मानव भी बनाता है। सत्य, धर्म, मर्यादा और प्रेम – ये सभी गुण राम नाम के साथ स्वतः जीवन में उतर आते हैं। यही कारण है कि तुलसीदास जैसे महान संतों ने राम नाम को स्वयं राम से भी अधिक शक्तिशाली बताया है। उनका मानना था कि नाम में वह सामर्थ्य है जो रूप से भी आगे है। अंततः यह कहा जा सकता है कि राम नाम केवल भक्ति का साधन नहीं, बल्कि जीवन को पावन और सार्थक बनाने का अमोघ उपाय है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका स्मरण करता है, उसके लिए भवसागर बाधा नहीं बनता। राम नाम की कृपा से जीवन की नाव सहज ही उस पार पहुँच जाती है, जहाँ शांति, आनंद और परम सत्य का अनुभव होता है। यही राम नाम की सच्ची महिमा है।



