गुरु की कृपा – भवतारिणी गुरु की शरण मानव जीवन को सार्थक कर देती हरिद्वार

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) भूपतवाला स्थित परमहंस अविनाशी हरि गोविंद धाम में आयोजित विशाल संत भंडारे तथा वार्षिक कार्यक्रम के अवसर पर एक विशाल संत समागम आयोजित किया गया प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान ब्रह्मलीनपरम पूज्य श्री श्री सम्बोध प्रकाश जी महाराज प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी हरिप्रकाश जी महाराज की पतित पावन स्मृतियों को भावपूर्ण याद करते हुए अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये इस अवसर पर बोलते हुए महंत रवि देव ने कहा संत महापुरुषों के पावन वचन हमारे मनुष्य जीवन की सार्थकता इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द महाराज ने कहा सतगुरु की पावन शरण और धर्म कर्म मनुष्य के भाग्य का उद्धार कर देते हैं महामंडलेश्वर श्री राम मुनि महाराज ने कहा गुरु भक्तों के भविष्य के निर्माण करता है धर्म-कर्म भजन सत्संग के माध्यम से उन्हें हरि की शरणागत करते हुए उध्दार का मार्ग दिखा देते महंत श्री सूरज दास महाराज ने कहा संत महापुरुषों के श्री मुख से निकलने वाले पावन वचन मनुष्य के जीवन को दिशा प्रदान करते हुए धर्म कर्म के मार्ग से भगवान की शरणागत कर देते हैं कार्यक्रम का आयोजन परम पूज्य स्वामी मुक्तानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए प्रखर विद्वानपंडित श्री दीपक पोखरियाल जी ने कहा

इस संसार रूपी भवसागर में मनुष्य जन्म लेकर अनेक प्रकार के दुःख, मोह, अज्ञान और कर्मबंधन में फँस जाता है। जीवन की यह यात्रा बिना किसी पथप्रदर्शक के अत्यंत कठिन है। ऐसे में जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए, वही गुरु है। गुरु की कृपा को ही “भवतारिणी” कहा गया है, अर्थात् वह कृपा जो जीव को संसार के बंधनों से पार उतार दे।

गुरु केवल शिक्षा देने वाला नहीं होता, बल्कि वह जीवन को दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है। माता-पिता हमें जन्म देते हैं, किंतु गुरु हमें सही अर्थों में जीवन जीना सिखाते हैं। गुरु की कृपा से ही शिष्य के भीतर छिपी हुई शक्तियाँ जागृत होती हैं और वह अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है।

गुरु की महिमा

शास्त्रों में कहा गया है—

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।”

अर्थात् गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही महेश हैं। गुरु ही सृष्टि, पालन और संहार—तीनों के स्वरूप हैं। जिन पर गुरु की कृपा हो जाती है, उनके जीवन से अज्ञान, भय और निराशा स्वतः दूर हो जाते हैं।

गुरु की कृपा बाहरी चमत्कार से नहीं, बल्कि अंतर्मन के परिवर्तन से प्रकट होती है। जब शिष्य के विचार शुद्ध होते हैं, कर्म सही दिशा में बढ़ते हैं और जीवन में संतुलन आता है, तभी समझना चाहिए कि गुरु की कृपा बरस रही है।

भवतारिणी कृपा का महत्व

भवतारिणी गुरु कृपा का अर्थ है—संसार के दुखों, अहंकार, लोभ, मोह और अज्ञान से मुक्ति। गुरु हमें यह सिखाते हैं कि यह संसार अस्थायी है, लेकिन आत्मा शाश्वत है। गुरु की कृपा से ही जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है।

जब जीवन में संकट आते हैं, तब गुरु की वाणी दीपक की तरह मार्ग दिखाती है। कई बार गुरु भौतिक रूप में साथ न भी हों, फिर भी उनकी शिक्षा और आशीर्वाद हमें संभाल लेते हैं। यही गुरु की सच्ची भवतारिणी शक्ति है।

शिष्य और गुरु का संबंध

गुरु-शिष्य का संबंध अत्यंत पवित्र होता है। यह संबंध विश्वास, श्रद्धा और समर्पण पर आधारित होता है। जिस शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा होती है, उसके लिए असंभव कुछ भी नहीं रहता। गुरु की कृपा से साधारण मनुष्य भी असाधारण बन जाता है।

अंततः यही कहा जा सकता है कि गुरु के बिना जीवन दिशाहीन है। गुरु की कृपा ही भवसागर से पार लगाने वाली नौका है। जिस पर गुरु की कृपा हो जाती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। इसलिए हमें सदैव गुरु के चरणों में श्रद्धा रखनी चाहिए और उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

गुरु की कृपा से ही जीवन सफल है,

गुरु की कृपा ही सच्ची भवतारिणी है। श्री कस्तूरी लाल ने कहा जो गुरु की शरणागत हो जाते हैं उनका मानव जीवन सफल हो जाता है श्री बलदेव राज दुआजी ने कहा गुरु चरणों की रज मनुष्य जीवन को सार्थक कर देती है श्री राकेश गोगिया ने कहा मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता गुरु की शरणागत होने से यह मानव जीवन सार्थक हो जाता है इस अवसर पर महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज महंत दिनेश दास महाराज महंत रवि देव महाराज स्वामी मुक्तानंद महाराज महंत प्रेमानंद महाराज स्वामी प्रेमदास महाराज महंत सूरज दास महाराज महंत नारायण दास पटवारी महाराज महंत मोहनदास महाराज महंत कोठारी राघवेंद्र दास महाराज महंत दुर्गादास महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत गुरमल सिंह महाराज महंत वीरेंद्र स्वरूप महाराज महंत केशवानंद महाराज ट्रस्टी तथा भक्त श्री कस्तूरी लाल दुआ श्री बलदेव राज राकेश गोगिया श्री सुरेंद्र शास्त्री प्रेम मकड कोतवाल रामेश्वर गिरी महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थितथे

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