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गुरूभक्ति मानव जीवन की वह पवित्र साधना है जो सीधे ईश्वर-साक्षात्कार के द्वार तक पहुँचा देती है हरिद्वार

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) खड़खड़ी स्थित गंगा भक्ति आश्रम के परमाध्यक्ष परम तपस्वी ज्ञान मूर्ति श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती जी महाराज ने गुरु भक्ति मानव जीवन की वह पवित्र साधना है जो सीधे ईश्वर साक्षात्कार के द्वारा तक पहुंचा देती हैभक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कहाजब शिष्य पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ अपने गुरू के चरणों में स्वयं को अर्पित कर देता है, तब उसका जीवन अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो उठता है। गुरू केवल शास्त्रों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि वह शिष्य के भीतर छिपी चेतना को जाग्रत करता है, उसके दोषों को दूर कर उसे सही राह दिखाता है। गुरू-भक्ति में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होता, यह तो भीतर से उपजने वाली निष्ठा और प्रेम की धारा होती है, जो शिष्य को संसार की मोह-माया से ऊपर उठाकर ब्रह्म-ज्ञान की ओर ले जाती है। जिस प्रकार अंधकार में दीपक मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार गुरू अपने शिष्य को जीवन की कठिनाइयों, भ्रमों और असत्य से निकालकर सत्य और शांति की ओर अग्रसर करता है। जब शिष्य गुरू की आज्ञा को ईश्वर की आज्ञा मानकर स्वीकार करता है, तब उसके कर्म पवित्र हो जाते हैं और उसका मन स्थिर हो जाता है। गुरू-भक्ति ही वह सीधा मार्ग है जो आत्मा को परम सत्य से जोड़ता है, क्योंकि गुरू और ईश्वर में कोई भेद नहीं माना गया है। सच्चे गुरू की कृपा से ही शिष्य को यह बोध होता है कि ईश्वर बाहर नहीं, बल्कि उसके भीतर ही निवास करता है। इसलिए कहा गया है कि गुरू-भक्ति ही मोक्ष का साधन है, और जिस जीवन में गुरू के प्रति अटूट श्रद्धा होती है, वही जीवन वास्तव में धन्य और सार्थक होता है।

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