सत्य सेवा सत्यकर्म और भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाये, महंत स्वामी योगेश्वरानन्द महाराज  हरिद्वार

हरिद्वार दीप्ति कुटी गीता कुटीर वाली गली भूपतवाला के श्री महंत प्रातः स्मरणीय परम पूज्य स्वामी योगेश्वरानंद महाराज ने हिमाचल की पावन धरती पर अपने श्री मुख से भक्तजनों के बीच उद्गार व्यक्त करते हुए कहा,सद्गुरु की पावन वाणी, गुरु महिमा एवं दान-सत्कर्म का दिव्य संदेश सद्गुरु के श्रीमुख से निकले हुए पावन वचन केवल शब्द नहीं होते, बल्कि वे मनुष्य जीवन का मार्गदर्शन करने वाले दिव्य अमृत होते हैं। सद्गुरु की वाणी अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है तथा मनुष्य को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरु के उपदेशों को अपने जीवन में धारण करता है, उसका जीवन सफल, सार्थक और कल्याणकारी बन जाता है। गुरु का स्थान समस्त देवताओं से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही जीव को ईश्वर से मिलाने का मार्ग बताते हैं। गुरु अपने ज्ञान, तप और करुणा से शिष्य के भीतर छिपे सद्गुणों को जागृत करते हैं तथा उसे आत्मकल्याण की ओर अग्रसर करते हैं। गुरु की कृपा से मनुष्य के जीवन के अनेक संकट दूर होते हैं और उसके भीतर सेवा, त्याग, विनम्रता तथा सदाचार जैसे दिव्य गुणों का विकास होता है। दान और सत्कर्म मानव जीवन के अमूल्य आभूषण हैं। जो व्यक्ति निष्काम भाव से दान करता है तथा सदैव परोपकार, सेवा और धर्म के कार्यों में लगा रहता है, उस पर भगवान और गुरु की विशेष कृपा बनी रहती है। दान केवल धन का ही नहीं, बल्कि समय, ज्ञान, श्रम, प्रेम और सद्भाव का भी होना चाहिए। सच्चा दान वही है जो बिना किसी अहंकार और स्वार्थ के लोककल्याण की भावना से किया जाए। मनुष्य को चाहिए कि वह गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए सत्य, सेवा, भक्ति और सत्कर्म को अपने जीवन का आधार बनाए। यही जीवन की वास्तविक सफलता है। गुरु की पावन वाणी का अनुसरण करने वाला व्यक्ति स्वयं भी सुख, शांति और संतोष प्राप्त करता है तथा समाज में धर्म, प्रेम और मानवता के आदर्शों को स्थापित करने का माध्यम बनता है। यही गुरु महिमा का सच्चा स्वरूप है और यही मानव जीवन का परम कल्याण है।यदि चाहें, तो मैं इसे प्रवचन शैली में और अधिक भावपूर्ण तथा अखबार में प्रकाशित होने योग्य भी विस्तृत कर सकता हूँ।

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