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भक्ति भक्त और भगवान के बीच सेतु का कार्य करती है : मुख्य यजमान सुनील सर्राफ हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। सप्त सरोवर रोड स्थित प्रसिद्ध कामधेनु लोक में प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री रवि नंदन जी महाराज श्रीमुख से चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ एवं कथा के पाँचवें दिवस पर श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा अमृत का रसास्वादन किया। कथा के दौरान भगवान की भक्ति, सत्संग और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अनेक प्रेरणादायक दृष्टांत प्रस्तुत किए गए।कथा के मुख्य यजमान श्री सुनील सर्राफ ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक पुराण ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान का महासागर है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा जीवन में धर्म, प्रेम, करुणा और सेवा के संस्कार विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव जीवन को सार्थक बनाने वाली अमृतमयी सुधा है, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर ईश्वर की शरण में ले जाती है।परम पूज्य कथा व्यास श्री रवि नंदन जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि भक्ति भक्त और भगवान के बीच एक पवित्र सेतु का कार्य करती है। जब जीव निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है तो ईश्वर की कृपा स्वतः उस पर बरसने लगती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, विश्वास और सत्संग के माध्यम से ही आत्मिक उन्नति संभव है। भगवान का नाम, कथा और कीर्तन मनुष्य के जीवन को प्रकाशित करने वाले ऐसे दीपक हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर देते हैं।कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और मधुर संगीतमय वर्णन ने समस्त श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीहरि के जयघोष के साथ कथा का आनंद लिया तथा अपने जीवन में धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।अंत में सभी भक्तों ने कथा व्यास का आशीर्वाद प्राप्त कर विश्व शांति, मानव कल्याण और धर्म की उन्नति के लिए प्रार्थना की। कथा महोत्सव प्रतिदिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रदान करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। परम पूज्य श्री गौरी शंकर सर्राफ जी की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से सराफा परिवार सिरसा से पधारे हुए हैं इस अवसर पर बोलते हुए श्री पुनीत धानुका जी ने कहा भक्ति और ईश्वर में आस्था से जो आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है वह एक ऐसपवपावन दिव्य मार्गदर्शन होता है, जो हमारे मनुष्य जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है और ईश्वर की कृपा सुख शांति समृद्धि के रूप में हमें प्राप्त होने के साथ-साथ हमारा लोक एवं परलोक, दोनों सुधर जाते हैं इस अवसर पर श्री अर्पित सर्राफ श्री तुषार सर्राफ श्री सुनील सर्राफ श्री सुशील सर्राफ जी ने कहा हमारा मन भक्ति रस में, आनंदित तथा भाव विभोर हो चुका है चारों तरफ ज्ञान की वर्षा हमारे मन मस्तिष्क का विकास करने के साथ-साथ हमारे जीवन को उध्दार की और ले जा रही है

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