विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार में भू-माफियाओं का बढ़ता आतंक: न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखाकर करोड़ों की संपत्ति पर कब्जे की साजिश हरिद्वार

हरिद्वार, 25 मार्च 2026जिसे सनातन आस्था, धर्म और आध्यात्म की राजधानी माना जाता है, आज एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति से गुजर रहा है। जहां एक ओर यह नगरी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मोक्ष और शांति का केंद्र है, वहीं दूसरी ओर भू-माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस ने इस पवित्र भूमि की छवि को धूमिल करना शुरू कर दिया है। ताजा मामला ऋषिकुल नई बस्ती क्षेत्र का है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, खाता संख्या 247 से संबंधित एक मूल्यवान संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसी विवाद का फायदा उठाते हुए भू-माफियाओं ने सुनियोजित तरीके से मकान को पहले ध्वस्त किया और उसे खाली प्लॉट में तब्दील कर दिया। इसके बाद मौके पर दीवार खड़ी कर गेट लगाकर अवैध कब्जा जमाने का प्रयास किया गया, मानो कानून और प्रशासन का कोई भय ही न हो।इस पूरे घटनाक्रम की भनक जैसे ही संपत्ति स्वामिनी श्रीमती अश्विनी चौहान को लगी, वे बिना देर किए मौके पर पहुँचीं और अवैध निर्माण कार्य को रुकवाने का प्रयास किया। इसके पश्चात वे मायापुर चौकी पहुँचीं, जहाँ उन्होंने पुलिस प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध कब्जा और निर्माण को रोकने की मांग की। हालांकि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस ने उनसे दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कहकर कार्रवाई में ढिलाई बरती और तरह-तरह की औपचारिकताएं गिनाईं, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।लेकिन जैसे ही मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, पुलिस हरकत में आई और मौके पर पहुँचकर अवैध निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया। इसके बावजूद यह प्रश्न बना हुआ है कि आखिर प्रारंभिक स्तर पर इतनी गंभीर शिकायत को हल्के में क्यों लिया गया।इस प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उक्त संपत्ति को लेकर वर्ष 2023 में FIR संख्या 769 पहले से दर्ज है और मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इतना ही नहीं, माननीय न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से “यथास्थिति बनाए रखने” का आदेश भी जारी किया गया है। इसके बावजूद भू-माफियाओं द्वारा खुलेआम आदेशों की अवहेलना करना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।आरोप यह भी सामने आए हैं कि भू-माफियाओं ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए एक कोर्ट लिपिक को अपने पक्ष में कर फर्जी न्यायालयीय आदेश तैयार करवाया। इसके आधार पर नगर निगम, जल विभाग तथा विद्युत विभाग में अपना नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया, जिससे यह साबित होता है कि यह सिर्फ साधारण कब्जे का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित षड्यंत्र है।हालांकि, श्रीमती अश्विनी चौहान की सतर्कता के चलते इस फर्जीवाड़े का समय रहते पर्दाफाश हुआ और उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। प्रशासन द्वारा तत्परता दिखाते हुए सभी फर्जी प्रविष्टियों पर रोक लगाई गई और आगे की जांच शुरू की गई।
इस पूरे प्रकरण में मनोज नामक युवक, पूजा और राजकुमार बंजारा की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो लंबे समय से इस संपत्ति पर नजर गड़ाए हुए हैं। बताया जाता है कि मनोज ने पहले इस संपत्ति को एक लिखित एग्रीमेंट के माध्यम से अपनी मुंहबोली बहन श्रीमती रश्मि के नाम रजिस्ट्री करवाई थी। बाद में यह संपत्ति विधिवत रूप से श्रीमती अश्विनी चौहान द्वारा खरीदी गई।श्रीमती चौहान ने नियमानुसार विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराकर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसी दौरान भू-माफियाओं की नजर इस संपत्ति पर पड़ गई और षड्यंत्रों का सिलसिला शुरू हो गया।सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि इस साजिश में एक कथित संत बाबा हरिओम पुरी (चेला मोहनपुरी) को भी शामिल किया गया। आरोप है कि उनके नाम पर वर्ष 1998 की एक फर्जी वसीयत तैयार की गई और उसी के आधार पर दोबारा फर्जी एग्रीमेंट बनाकर संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई।समय रहते जानकारी मिलने पर श्रीमती चौहान ने निर्माण कार्य को रुकवा दिया, लेकिन इसके बावजूद परमिट कुमार और शशिकांत शरण (बागपत, मेरठ निवासी) जैसे लोग अब भी मौके के आसपास सक्रिय बताए जा रहे हैं और दोबारा अवैध निर्माण की फिराक में हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या न्यायालय के आदेश अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं?क्या प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह के अवैध कब्जे होते रहेंगे?क्या धर्मनगरी में आम नागरिक की संपत्ति सुरक्षित नहीं है?हरिद्वार जैसी पवित्र नगरी में इस प्रकार की घटनाएँ न केवल कानून व्यवस्था की स्थिति को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि भू-माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं। करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए वे फर्जी दस्तावेज, प्रभाव और दबाव—हर हथकंडा अपनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।अब समय आ गया है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कठोर और निर्णायक कार्रवाई करे, ताकि न केवल पीड़ित को न्याय मिल सके, बल्कि भविष्य में इस प्रकार के कृत्यों पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सके। वरना वह दिन दूर नहीं जब आस्था की इस नगरी पर भू-माफियाओं का साया और गहरा हो जाएगा।

