बाबा टहलदास भवन में भव्य संत भंडारे का दिव्य आयोजन हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद श्रवण नाथ नगर स्थित प्रसिद्ध बाबा टहलदास सेवक मंडल धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा हरमिलाप के सामने वाली गली स्थित बाबा टहलदास भवन में वार्षिक अधिवेशन के शुभ अवसर पर एक विशाल एवं भव्य संत भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत महापुरुषों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने सहभाग कर धर्म लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। इस पावन अवसर पर श्री संत मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप जी महाराज ने अपने अमृतमय आशीर्वचनों में कहा कि संत महापुरुषों का सानिध्य मनुष्य जीवन को सफल एवं कल्याणकारी बनाता है। उन्होंने कहा कि गुरु भक्ति, सत्संग एवं सेवा ही मानव जीवन की वास्तविक पूंजी है, जिससे समाज में प्रेम, सद्भाव एवं संस्कारों का विस्तार होता है। कार्यक्रम में विद्वान कथावाचक आचार्य राकेश उपाध्याय शास्त्री ने अपने श्रीमुख से दिव्य, प्रेरणादायी एवं कल्याणकारी वचनों की अमृत वर्षा करते हुए धर्म, संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज को सत्य एवं धर्म के पथ पर आगे बढ़ाने का कार्य करता है। इस अवसर पर साकेत आहूजा ने संत महापुरुषों एवं गुरुजनों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सुंदर एवं प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए। वहीं अविनाश जी ने धर्म एवं सेवा भावना को मानव जीवन का आधार बताया। अनिल पुरी ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित श्रद्धालुओं को समाज सेवा एवं आध्यात्मिक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। जगदीश लाल आहूजा ने भी संत महापुरुषों की महिमा का गुणगान करते हुए धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम में महेंद्र शत्रुघ्न दास जी ने भी अपने पावन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद मानव जीवन को सुख, शांति एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। उनके प्रेरणादायी विचारों से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अंत में विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संतों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पूरा बाबा टहलदास भवन भक्तिमय जयघोषों एवं संत महापुरुषों के आशीर्वचनों से गूंज उठा।





