एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा मंत्र के ऋषि सत्पुरुष बाबा फुलसन्दे वाले

ऋषि सत्पुरुष बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैं मैं पुण्य के पथ पर रात दिन रात दिन चलता रहा हे आदि पुरुष परमेश्वर तेरे नाम को धूल गरद पर बैठा हुआ उंगलियों से मैं लिखता रहा और यह जीवन जाने कब बीत गया। फूल बहारों के मौसम ना जाने कब बीत गए मेरा दिल जानता है तू यहीं कहीं पर मेरे आस-पास है । मुझे मालूम है ओ आसमान वाले तू मेरे हृदय में मेरी आत्मा में युगों युग से निवास करता है मेरी छाया इस संसार में यहां से वहां वहां से वहां भटकती रही और फूलों के मौसम बीत गए जो भी मिलता है मुझे मैं उससे तेरा ही जिक्र करता हूं। कितने ही चेहरे हैं परछाई जैसे गौर से देखता हूं तेरी ही बातें करता हूं धर्म कर्म की बातें केवल किताबों में रह गई हैं लोग सच्चाई का पालन नहीं करते इसलिए उनका जीवन दुख झेलते हुए बीतता है। लोगों ने झूठ फरेब को होशियारी समझ लिया है, जीवनसाथी को धोखा देते हैं और कसम खाते रहते हैं झूठी कसम से उनके उपवन के फूल भी सूख जाते हैं। तेरी रोशनी का धागा हे परमेश्वर अपने हाथ में लिए मेरी आत्मा आसमानों को चढ़ती रही तेरे गीतों को रात दिन यहां वहां जहां-तहां मैं गाता रहा मेरी सांसों में तो केवल तुम ही तुम थे । सच पूछो तो दुनियाँ में हवा का झोंका है आदमी आज यहां है कल कहां होगा कुछ पता नहीं है। दर_बदर यह जिंदगी भटकती रही और फूलों के मौसम बीत गए। एक के दिल को भी सुकून नहीं पहुंचा एक को भी हमने खुशी नहीं पहुंचाई और जाने कितने लोगों के दिल हमने दुखाए इसीलिए तो दुनियाँ से लोग रोते तड़पते चले जाते हैं हम लोग क्या करने आए थे और यहां आकर क्या-क्या हमने किया नूर की कश्ती में मेरी आत्मा सवार थी। नूर की कश्ती क्या है उस परमेश्वर की आराधना…! भवसागर का गर्जन था और उस प्रभु के संगीत की भी झंकार मेरे हृदय में गूंजती थी । उठते हुए तूफानों में हे प्रभु मेरे कंधे पर अपना हाथ रख हुए तू मेरे साथ-साथ चलता था । मैं तो रजनीगंधा की तरहा महकता था गुरु चरणों में मेरी आत्मा पक्षी की तरहा चहकती थी । यह जीवात्मा नन्ही चिड़िया की तरह बोलती बोलती थकती नहीं थी चहचहाती और फुदकती थी । फुलसन्दे वाले बाबा कहते सुख-दुख और फूलों के मौसम जाने कब बीत गए। यह जीवन न जाने कब गुजर गया मुझे पता ही नहीं चला । मेरा सर तो हे आदि पुरुष हे परमेश्वर तेरे ध्यान में तेरी स्तुति में तेरे आगे झुका हुआ था।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
सत्संग के बाद बहुत से लोगों ने मंत्र दीक्षा ली और भोजन का प्रसाद भी ग्रहण किया अंतिम दिन आज सत्पुरुष बाबा फुलसन्दे वालों का संगत की तरफ से तुलादान किया गया और यह जो तुलादान में धन आता है यह सेवा अपने सैनिकों को जो शहीद हो गए हैं उन जवानों के लिए अर्पित किया जाता है या दूसरे धर्म कार्यों में इसको समर्पित कर दिया जाता है। सत्संग में मुख्यतया पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, श्री जसवंत सिंह, नंदकिशोर गिरी, आकाश त्यागी, रणजीत सिंह राणा, अनुज चौधरी, अमरनाथ मदान, देवपाल राठी, प्रदीप मिश्रा, डॉ अशोक शर्मा आर्य, भावना शर्मा, अलख निरंजन, सुभाष अरोड़ा, राजेंद्र सिंह, दीपक राठौड़, मधु मेहंदी रत्ता, उर्मिला सिंह, अलका मेहंदी रता, बिना मदन, सुषमा देव पुत्री इत्यादि श्रद्धालु उपस्थित रहे। एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा



