कार्तिक मास में की गयी आराधना दान सत्यकर्म मनुष्य भाग्य का उदय कर देते हैं श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज हरिद्वार

हरिद्वार(वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज कुमार मनोजानंन्द जी महाराज )खड़खड़ी स्थित गंगा भक्ति आश्रम के परमाध्यक्ष परम तपस्वी श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कार्तिकेय महीने में की गई भक्ति तुरंत फलदायी होती है जो भक्त माता गंगा यमुना सरस्वती मे कार्तिक पूर्णिमा को स्नान कर अपने आराध्य देवी देवता का सिमरन करते हैं उनके जीवन में भगवान कार्तिकेय की कृपा से सुख शांति समृद्धि की वर्षा होती है जीवन के सभी कष्ट संताप दूर हो जाते हैं भारतीय संस्कृति में बारहों मास अपने-अपने महत्व और विशेषता लिए हुए हैं, परंतु इन सबमें कार्तिक मास को सर्वाधिक पवित्र माना गया है। यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे “दान, स्नान और साधना का महीना” कहा गया है।

कार्तिक मास का परिचय

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास अश्विन के बाद और मार्गशीर्ष से पहले आता है। यह समय सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर के बीच पड़ता है। यह महीना भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों का प्रिय माना गया है। इस मास में किया गया एक-एक शुभ कर्म कई गुना फल देता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, इस मास में भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसीलिए इस मास की पूर्णिमा “त्रिपुरारी पूर्णिमा” या “देव दीपावली” के नाम से जानी जाती है। कार्तिक मास में स्नान का महत्व

शास्त्रों में लिखा है —

“कार्तिके मासि यः स्नाति स याति परमां गतिम्।”

अर्थात्, जो व्यक्ति कार्तिक मास में प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र नदी या जल में स्नान करता है, वह मोक्ष की प्राप्ति करता है।

इस महीने में गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु की उपासना, दीपदान और तुलसी पूजन का विशेष महत्व है।

तुलसी और दीपदान का विशेष महत्व

कार्तिक मास को “तुलसी का महीना” भी कहा जाता है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की पत्नी के रूप में पूजा जाता है। इस महीने में तुलसी विवाह का उत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है, जो वैवाहिक जीवन की शुभता का प्रतीक है।

इसके अतिरिक्त, कार्तिक मास में दीपदान का विधान है। प्रत्येक संध्या को घर के द्वार, मंदिर और नदी तट पर दीप जलाने से अंधकार और नकारात्मकता दूर होती है। दीपक ज्ञान, प्रकाश और आशा का प्रतीक है।

उपवास, व्रत और भक्ति का माह

कार्तिक मास में अनेक व्रत और उपवास रखे जाते हैं। एकादशी, पूनम, प्रदोष और सोमवार के व्रत विशेष फलदायक माने गए हैं। भगवान विष्णु की आराधना, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप, और गीता पाठ इस महीने में अत्यंत शुभ माना गया है।

कई भक्त इस मास में “दीपदान महोत्सव”, “अन्नदान” और “भजन-कीर्तन” का आयोजन करते हैं। यह मास आत्मशुद्धि, संयम और करुणा की भावना का संदेश देता है। देव दीपावली का महत्व

कार्तिक मास की पूर्णिमा को “देव दीपावली” के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवता स्वयं गंगा तट पर आकर दीप जलाते हैं। वाराणसी में इस पर्व का दृश्य अद्भुत होता है — पूरा घाट दीपों से जगमगा उठता है, वातावरण में मंत्रोच्चार और भजन की ध्वनि गूंजती है। यह दृश्य लोक और परलोक दोनों को पवित्र करने वाला माना गया है। सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कार्तिक मास का संदेशयह महीना केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी समय है। कार्तिक के महीने में सुबह-सुबह खुली हवा में स्नान और ध्यान करने से शरीर और मन दोनों पवित्र रहते हैं। यह मौसम परिवर्तन का काल भी है — वर्षा समाप्त होती है और शरद ऋतु की शांति वातावरण में बस जाती है।कार्तिक मास भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक गहराई का प्रतीक है। यह महीना हमें सिखाता है कि जीवन में प्रकाश, संयम, दया और भक्ति का होना उतना ही आवश्यक है जितना शरीर के लिए भोजन। इस मास का सच्चा पालन केवल पूजा से नहीं, बल्कि अपने आचरण को शुद्ध करने से होता है। जब हम दूसरों के जीवन में भी प्रकाश जलाते हैं, तभी कार्तिक मास का वास्तविक अर्थ साकार होता है। “कार्तिक मास हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में सबसे बड़ा दीपक हमारी भक्ति और कर्म ही हैं।”

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