होप चिकित्सालय के मार्ग को लेकर विवाद चिकित्सालय प्रबंधन ने कहा—मरीजों की सुविधा के लिए मार्ग की व्यवस्था , दुरुस्त करना जरूरी हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। जगदीशपुर स्थित होप चिकित्सालय चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अग्रणी भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। आगामी दिनों में चिकित्सालय परिसर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके चलते वीआईपी मूवमेंट भी होना है। इसी को लेकर चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा अपनी रजिस्ट्री में उल्लेखित मार्ग की साफ-सफाई एवं व्यवस्था दुरुस्त कराने का प्रयास किया गया, जिसको लेकर कुछ स्थानीय नागरिकों ने आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया। मामले को लेकर अपना पक्ष रखते हुए होप चिकित्सालय के एमडी डॉ. एस.के. मिश्रा ने कहा कि कोई भी अस्पताल केवल भवन नहीं, बल्कि मरीजों को समय पर और सुगमता के साथ चिकित्सा उपलब्ध कराने का माध्यम होता है। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चिकित्सालय तक पहुंचने वाले मार्ग का सुगम और व्यवस्थित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा मार्ग की साफ-सफाई और आवश्यक व्यवस्थाएं इसलिए की जा रही थीं, ताकि मरीजों को चिकित्सालय तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने दावा किया कि उक्त मार्ग का उल्लेख चिकित्सालय की रजिस्ट्री में भी किया गया है।
ऐसे में मार्ग की व्यवस्था सुधारने के कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जैसी मानवीय सेवा से जुड़े संस्थान को समाज का सहयोग मिलना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीज बिना किसी बाधा के समय पर उपचार प्राप्त कर सकें। वहीं, दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों ने इस मामले को अलग दृष्टिकोण से देखते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। स्थानीय निवासी श्री जाहिद सलमानी ने कहा कि जिस स्थान को चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा रास्ता बताया जा रहा है, वह कब्रिस्तान की भूमि है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भावनाएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं और इस विषय में उनकी आपत्ति को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मामले को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क सामने आए हैं। एक ओर चिकित्सालय प्रबंधन मरीजों की सुविधा, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और आगामी कार्यक्रम को देखते हुए मार्ग को व्यवस्थित करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिक उक्त भूमि को कब्रिस्तान से संबंधित बताते हुए अपनी आपत्ति जता रहे हैं। ऐसे में पूरे प्रकरण का निष्पक्ष समाधान आपसी संवाद, प्रशासनिक स्तर पर स्थल की स्थिति के सत्यापन और उपलब्ध राजस्व/रजिस्ट्री अभिलेखों की जांच के बाद ही सामने आ सकता है। चिकित्सा सेवा से जुड़े संस्थान की सुगमता और स्थानीय नागरिकों की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं—दोनों का सम्मान करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाना आवश्यक है, जिससे मरीजों को उपचार तक पहुंचने में परेशानी न हो और किसी पक्ष की भावनाएं भी आहत न हों।



