संतों का सान्निध्य और ईश्वर में आस्था ही जीवन उद्धार का मार्ग : स्वामी, महंत श्यामसुंदर दास महाराज हरिद्वार।

हरिद्वार श्यामपुर स्थित प्रसिद्ध श्री श्याम वैकुण्ठ धाम में आयोजित आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम में परमाध्यक्ष परम पूज्य स्वामी श्यामसुंदर दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से अमृतमयी वाणी का प्रसार करते हुए कहा कि संत महापुरुषों का पावन सान्निध्य मानव जीवन के लिए ईश्वर की विशेष कृपा का स्वरूप है। संतों के सान्निध्य से मनुष्य के भीतर सद्गुणों का विकास होता है तथा उसका जीवन धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर अग्रसर होता है।उन्होंने कहा कि ईश्वर में अटूट आस्था मनुष्य को जीवन के प्रत्येक संकट से पार लगाने की शक्ति प्रदान करती है। सांसारिक मोह-माया में उलझा हुआ मनुष्य जब भक्ति के मार्ग को अपनाता है तो उसके जीवन में आत्मिक शांति, संतोष और आनंद का संचार होता है। भक्ति मार्ग ही मानव जीवन को सार्थक बनाने का सर्वोत्तम साधन है।इस अवसर पर श्री राम निकेतन के परम पूज्य स्वामी महंत ज्ञानानंद जी महाराज ने भक्ति के महत्व पर अपने दिव्य विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्ति वह दिव्य शक्ति है जो जीव को परमात्मा से जोड़ती है। भक्ति के बिना ज्ञान और कर्म भी पूर्ण फल प्रदान नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम, सत्संग, सेवा और सदाचार मनुष्य के जीवन को पवित्र एवं कल्याणकारी बनाते हैं।स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता। जो व्यक्ति विनम्रता, प्रेम और समर्पण भाव से प्रभु की आराधना करता है, उसके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के द्वार स्वतः खुल जाते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से नियमित रूप से सत्संग, जप, ध्यान और सेवा कार्यों में सहभागी बनने का आह्वान किया।सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने संत महापुरुषों के श्रीमुख से निकले प्रेरणादायी विचारों का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और गुरु महिमा के जयघोषों से भक्तिमय बना रहा। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में धर्म एवं भक्ति के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।




