ज्ञान और भक्ति मनुष्य जीवन की सबसे बहुमूल्य निधि स्वामी कल्याण देव महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद भूपतवाला के 10 नंबर ठोकर पर स्थित प्रसिद्ध गंगा तट पर आज प्रातःकाल एक अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला जहाँ बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित होकर गुरु वचनों का श्रवण कर रहे थे। इस पावन अवसर पर ज्ञान गोदड़ी पीठाधीश्वर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु भगवान स्वामी कल्याण देव जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भक्तजनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए जीवन के गूढ़ सत्य को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि इस संसार में ज्ञान और भक्ति मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी और अमूल्य निधि हैं, जिनके बिना मानव जीवन अधूरा और दिशाहीन हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में अर्जित किया गया ज्ञान ऐसा अनमोल धन है जिसे न कोई व्यक्ति छीन सकता है, न नष्ट कर सकता है और न ही समाप्त कर सकता है, बल्कि यह सदैव मनुष्य के साथ रहता है और उसके जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। महाराज जी ने आगे कहा कि ज्ञान का कभी भी क्षय नहीं होता और यह जितना बांटा जाए उतना ही बढ़ता है, किंतु इसका वास्तविक स्वरूप ऐसा है कि इसे कोई व्यक्ति किसी से छीन नहीं सकता। साथ ही उन्होंने भक्ति के महत्व को बताते हुए कहा कि भक्ति वह पवित्र, मंगलकारी और कल्याणकारी शक्ति है जो मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाती है तथा उसे संसार के बंधनों से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में ज्ञान और भक्ति दोनों को आत्मसात कर लेता है, तब उसका जीवन वास्तव में धन्य, सफल और परम कल्याणकारी बन जाता है। इस अवसर पर उपस्थित सभी भक्तजन महाराज जी के दिव्य वचनों को सुनकर भावविभोर हो उठे और संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।



