जो राम करे सो होय, राम से बड़ा न कोय, राम से बड़ा राम का नाम : सुमित तिवारी

हरिद्वार। वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद, भगवान राम द्वारा रचित इस संपूर्ण सृष्टि के विधान और उसकी अटूट व्यवस्था को रेखांकित करते हुए, हरिद्वार श्री राम नाम विश्व बैंक समिति के तत्वाधान में आयोजित आध्यात्मिक सत्संग में श्रद्धालु राम में आस्थावान भक्तों के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए राम नाम विश्व बैंक समिति के अध्यक्ष श्री सुमित तिवारी ने अपने श्री मुख से अत्यंत सारगर्भित और हृदयस्पर्शी उद्गार व्यक्त किए। महाराज जी ने भक्ति के मर्म को बड़ी गहराई से समझाते हुए कहा कि इस चराचर जगत में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब उस परम सत्ता की इच्छा और पूर्व निर्धारित विधान का ही प्रतिफल है—अर्थात “जो राम रचेसो होय”। उन्होंने श्रद्धालुजनो को बोध कराते हुए कहा कि मनुष्य अक्सर अपने पुरुषार्थ के अहंकार में यह भूल जाता है कि उसकी सांसों की डोर भी उसी रघुनाथ के हाथ में है। श्री तिवारी ने विस्तारपूर्वक समझाया कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित “होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा” की चौपाई केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। उन्होंने कहा कि जब हम जीवन की बागडोर प्रभु के हाथों में सौंप देते हैं, तो हमारे भीतर का ‘मैं’ समाप्त हो जाता है और वहीं से वास्तविक शांति का उदय होता है। हनुमान गुफा की दिव्यता का वर्णन करते हुए सुमित तिवारी जी ने बताया कि यह स्थान केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह वह तपस्थली है जहाँ पवनपुत्र हनुमान जी की सूक्ष्म उपस्थिति आज भी भक्तों के संकटों का हरण करती है। जिस प्रकार हनुमान जी ने अपनी शक्ति, बुद्धि और पराक्रम को सदैव श्री राम के चरणों में समर्पित रखा और स्वयं को केवल एक ‘दास’ माना, ठीक उसी प्रकार एक सच्चे साधक को भी अपने जीवन की सफलता और असफलता, दोनों को ही प्रभु का मंगलकारी प्रसाद मानकर स्वीकार करना चाहिए।सप्त सरोवर की इस पवित्र धरा पर उमड़े श्रद्धालुओं को शांति का मार्ग दिखाते हुए तिवारी जी ने आगे कहा कि आज का मानव भविष्य की चिंताओं और अतीत के पछतावे में घुलकर अपने वर्तमान को नष्ट कर रहा है। लेकिन जो भक्त यह जान लेता है कि विधाता ने उसके लिए जो कुछ भी रचा है, वह उसके परम कल्याण के लिए ही है, वह व्यक्ति निर्भय और निश्चिंत हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम जी की रची इस दुनिया में पत्ता भी उनकी आज्ञा के बिना नहीं हिलता, तो फिर हम व्यर्थ के मानसिक बोझ को ढोकर क्यों दुखी होते हैं? उन्होंने आह्वान किया कि भक्त अपनी श्रद्धा को इतना अडिग बनाएं कि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका विश्वास न डगमगाए।प्रवचन के अंत में, महाराज जी ने वातावरण को भक्ति के रस से सराबोर करते हुए कहा बिलेश्वर रोड हरिद्वार स्थित श्री राम नाम विश्व बैंक समिति में आकर जो भक्त निष्काम भाव से प्रार्थना करता है, उसे न केवल मानसिक संबल मिलता है, बल्कि उसके जीवन की दिशा भी बदल जाती है। उन्होंने सभी को परामर्श दिया कि प्रतिदिन कुछ समय मौन रहकर उस राम तत्व का ध्यान करें जो घट-घट में व्याप्त है। तिवारी जी के इन ओजस्वी और अमृतमयी वचनों को जयकारों से गुंजायमान हो उठी।

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