कार्तिक की पूर्णिमा जीवन में सुख शांति एवम समृद्धि प्रदान करती है महामंडलेश्वर गर्व गिरी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) श्यामपुर गाजीवाला कांगड़ी स्थित बाबा वीरभद्र सेवा आश्रम में अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय तपस्वी ज्ञान मूर्ति महामंडलेश्वर 1008 श्री गर्व गिरी जी महाराज ने कहा कार्तिक महा की पूर्णिमा जीवन से संताप दूर कर उसमें सुख शांति समृद्धि का वास करती है यह पूर्णिमा अति फलदाई है कार्तिक महा की पूर्णिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि का बहुत अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन को “देव दीपावली” के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था और त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत हुआ था। इसीलिए इस दिन को “त्रिपुरारी पूर्णिमा” भी कहा जाता है।
इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान, दान और दीपदान सहस्रगुणा फल देता है। लोग इस दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। गंगा घाटों पर हजारों दीप जलाकर देवताओं का स्वागत किया जाता है।
वाराणसी में इस दिन “देव दीपावली” का भव्य आयोजन होता है। पूरा शहर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और आरती की गूंज वातावरण को पवित्र बना देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मेले लगते हैं, झूले, मिठाइयाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पर्व की शोभा बढ़ाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व हमें प्रकाश, पवित्रता, और दान की भावना अपनाने की प्रेरणा देता है। यह दिन अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और प्रकाश का पर्व है। यह हमें जीवन में सदाचार, सत्य और प्रेम का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। जब हम दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते हैं, तभी असली अर्थों में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व सफल होता है।

