चित्रकूट एक ऐसा तीर्थ है जहां भक्ति प्रेम और मर्यादा के देव भगवान श्री राम आज भी महसूस किये जा सकते हैं श्री महंत विष्णु दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) श्रवण नाथ नगर स्थित गुरु राम सेवक उछाली आश्रम के परमाध्यक्ष अनंत विभूषित प्रातः स्मरणीय श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा चित्रकूट धाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताया

चित्रकूट, एक ऐसा दिव्य स्थल जहाँ धरती पर भगवान श्रीराम के चरण पड़े और जिसे स्वयं देवताओं ने धन्य कहा। यह स्थान केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भक्ति, त्याग और प्रेम का प्रतीक है।

जब भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के समय अयोध्या से निकले, तो उन्होंने चित्रकूट को अपना निवास स्थान चुना। घने जंगलों, शांत नदियों और मनोहर घाटों से घिरा चित्रकूट उस समय भी उतना ही सुंदर था जितना आज भक्तों के हृदय में है।

चित्रकूट के घाटों पर श्रीराम ने तप किया, सीता माता ने पतित पावनी मंदाकिनी नदी में स्नान किया और लक्ष्मण जी ने अपने भ्राता की सेवा में दिन-रात समर्पित रहकर धर्म का आदर्श प्रस्तुत किया। कहते हैं, यहाँ की हर रेत की कण-कण में राम का नाम गूंजता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी ‘रामचरितमानस’ में चित्रकूट की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा—

“चित्रकूट सब तीरथ राजू। नाइ मनहुँ परसि हरि साजू॥”

अर्थात, चित्रकूट सभी तीर्थों का राजा है, जहाँ जाकर ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान श्रीराम के सान्निध्य में हों।

चित्रकूट के घाट केवल पत्थर और पानी नहीं, बल्कि श्रद्धा और स्मृति का संगम हैं। यहाँ की मंदाकिनी नदी के किनारे बैठकर जब राम-नाम का जप किया जाता है, तो मन स्वयं शांत हो जाता है — जैसे श्रीराम अब भी वहीं विराजमान हों, अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए।

चित्रकूट के घाटों की महिमा अनंत है — जहाँ भक्ति, प्रेम और मर्यादा के देव श्रीराम आज भी अनुभव किए जा सकते हैं।

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