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संपूर्ण विश्व को आध्यात्म तथा सनातन का पाठ पढ़ायेगा निर्माण आधीन गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा बोले अध्यक्ष श्री संजीवन नाथ महाराज

हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) हरिद्वार की प्रसिद्ध तपो भूमि पर गुरु गोरखनाथ भगवान द्वारा बताये मार्गदर्शन पर चलने वाले नाथ संप्रदाय के साधु संत महापुरुषों के ज्ञान प्रवाह का सुंदर उपवन बनने जा रहा है गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के निर्माण आधीन भवन तथा संत महापुरुषों की तपस्या हेतु कुटियाओं का संग्रह भारत की महान संत परंपरा में गुरु गोरखनाथ जी का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा से लिया जाता है। अखाड़े के अध्यक्ष श्री संजीवन नाथ महाराज ने कहा इसी नाथ परंपरा का निर्माण करने वाले साधु संत ऋषि मुनि विश्व भर में सनातन का शंखनाद कर रहे हैं गुरु गोरखनाथ भगवान नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं और योग, भक्ति तथा अध्यात्म—तीनों के संगम स्वरूप हैं।

गुरु गोरखनाथ जी का जन्म लगभग 11वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उनके गुरु योगीराज मत्स्येन्द्रनाथ थे, जिनसे उन्होंने हठयोग, ध्यान और जीवन की गूढ़ साधनाएँ सीखीं। गोरखनाथ जी ने “हठयोग” को जन-जन तक पहुँचाया और यह बताया कि सच्चा योग केवल शरीर की क्रियाओं तक सीमित नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन की साधना है।

उन्होंने जाति-पांति, ऊँच-नीच और धर्म के भेदभाव को अस्वीकार किया। उनके विचार थे कि हर व्यक्ति के भीतर वही ईश्वर है, जिसे हम बाहर ढूंढते हैं। उन्होंने सादगी, संयम और आत्मनियंत्रण का संदेश दिया।

गुरु गोरखनाथ जी के उपदेशों का प्रभाव आज भी समाज में देखा जा सकता है। उनके नाम से अनेक मठ और पीठ स्थापित हैं, जिनमें गोरखपुर का गोरखनाथ मठ प्रमुख है। वहाँ आज भी उनके अनुयायी मानव सेवा, शिक्षा और योग साधना के मार्ग पर चल रहे हैं।

गोरखनाथ जी ने जीवनभर यह सिखाया कि “सच्ची पूजा मंदिर में नहीं, अपने कर्मों में होती है।” उन्होंने साधना के माध्यम से मानव को उसके वास्तविक स्वरूप—आत्मज्ञान—तक पहुँचने का मार्ग दिखाया।

गुरु गोरखनाथ जी केवल एक संत नहीं, बल्कि मानवता के प्रकाशस्तंभ थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा योग शरीर से नहीं, आत्मा से होता है; और सच्ची भक्ति दूसरों के कल्याण में है। गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े ने गुरु गोरखनाथ के मार्गदर्शन तथा सिद्धांतों को संपूर्ण विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने का संकल्प लिया है तथा सनातन परंपरा का शंखनाद करते हुए भारत की सबसे प्राचीन संस्कृति सनातन परंपरा को विश्व के हर व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लिया है आगामी कुंभ मेला 2027 में गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के विश्व के कोने-कोने से लाखों संत तथा भक्तजन कुंभ मेले में सनातन तथा धर्म का प्रचार प्रसार करने हेतु हरिद्वार पधारेंगे

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