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महामंडलेश्वर 1008 श्री संजय गिरी जी महाराज के श्री मुख से सनातन पर वार्तालाप

जिसके स्वभाव में आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति आस्था झलकती है वह ईश्वर की और जाने वाले सत्य के मार्ग की और अग्रसर है महामंडलेश्वर संजय गिरी महाराज हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) कांगड़ी स्थित सदगुरुदेव आश्रम में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से ज्ञान की वर्षा करते हुए अनंत विभूषित परम तपस्वी महामंडलेश्वर 1008 श्री संजय गिरी महाराज ने कहा जिसके स्वभाव में आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति आस्था झलकती है मानो वह सत्य के मार्ग की और अग्रसर है हमारी कार्यशैली और स्वभाव दूसरों को प्रतीत करा देता है कि हम किस मार्ग पर हैं अगर हमारे मन में दूसरों के प्रति सम्मान भाव ईश्वर के प्रति आस्था है और हमारे स्वभाव में दूसरों के प्रति आदर है तो वह मार्ग हमें स्वतः ही ईश्वर की और ले जाता है कहते हैं ना की जैसा पीया पानी वैसी हो गई वाणी और जैसा खाया अन्न वैसा हो गया मन अतः मित्र बनाओ जानकर और पानी पियो छानकर अपनी संगत सदैव गुणवान लोगों के साथ करें जिस प्रकार खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदल देता है इसी प्रकार अज्ञानी भी ज्ञानी की संगत में रहने से ज्ञानी बन जाता है किंतु अगर उसकी प्रवृत्ति ठीक है तो संगत और प्रवृत्ति का मनुष्य के जीवन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है बैठे आप मंदिर में हैं आध्यात्म पाठ चल रहा है किंतु ध्यान आपका कहीं और है तो ऐसी भक्ति ईश्वर स्वीकार नहीं करते चाहे पल भर की ही सही किंतु भक्ति निस्वार्थ निसप्रेम और निश्छल होनी चाहिये और यह सब गुरु की शरणागत होने से ही प्राप्त हो सकता है क्योंकि संतोष और धैर्य मनुष्य के जीवन को सार्थक कर देते हैं

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