देशभर में अब तक हजारों गंभीर किडनी रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सा से स्वस्थ कर चुके हरिद्वार के आयुर्वेदाचार्य : डॉ. धीरज शर्मा हरिद्वार।

हरिद्वार भारत की प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आधुनिक समय में नई पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हरिद्वार के आयुर्वेदाचार्य डॉ. धीरज शर्मा आज देशभर में किडनी रोगियों के लिए आशा का केंद्र बनते जा रहे हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा, शोध और सेवा भावना के माध्यम से डॉ. धीरज शर्मा ने हजारों गंभीर किडनी रोगियों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाकर अपनी अलग पहचान बनाई है।आज के समय में किडनी रोग तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुके हैं। गलत खानपान, अनियमित जीवनशैली, अत्यधिक दवाइयों का सेवन, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में लोग किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे कठिन समय में आयुर्वेद आधारित चिकित्सा के माध्यम से रोगियों को राहत प्रदान करने का कार्य डॉ. धीरज शर्मा लगातार कर रहे हैं। हरिद्वार स्थित उनके संस्थान में देश के विभिन्न राज्यों से मरीज उपचार के लिए पहुँच रहे हैं। राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के मरीजों ने यहाँ आयुर्वेदिक चिकित्सा और जीवनशैली मार्गदर्शन से लाभ मिलने की बात कही है। मरीजों का कहना है कि यहाँ केवल दवाइयाँ ही नहीं दी जातीं, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। डॉ. धीरज शर्मा का मानना है कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली को संतुलित करने वाली सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। वे उपचार के साथ-साथ रोगियों को खानपान, दिनचर्या, योग एवं मानसिक संतुलन के बारे में भी विस्तृत जानकारी देते हैं। उनका कहना है कि यदि व्यक्ति सही समय पर जीवनशैली में सुधार करे तो अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। कम उम्र में ही आयुर्वेद और स्वास्थ्य विषयों पर 160 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके डॉ. धीरज शर्मा लगातार नई औषधीय खोजों पर भी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कई जड़ी-बूटियों के संयोजन पर शोध करते हुए नवीन आयुर्वेदिक तकनीकों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों की चर्चा विभिन्न मंचों पर हो चुकी है।डॉ. धीरज शर्मा का उद्देश्य केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय आयुर्वेद को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से वे आयुर्वेदिक शोध, जनजागरूकता और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार में लगातार सक्रिय हैं। उनका मानना है कि भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति में अनेक जटिल रोगों के समाधान की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। विशेष बात यह है कि डॉ. धीरज शर्मा जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की सहायता के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं। उनके संस्थान में कई गरीब एवं असहाय रोगियों को निःशुल्क परामर्श और सहयोग प्रदान किया जाता है। वे “नर सेवा ही नारायण सेवा है” के सिद्धांत को अपनाते हुए मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. धीरज शर्मा को विभिन्न सामाजिक एवं स्वास्थ्य संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। आयुर्वेद के प्रति उनका समर्पण और शोध कार्य युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। वर्तमान समय में जब लोग प्राकृतिक और सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, तब हरिद्वार के आयुर्वेदाचार्य डॉ. धीरज शर्मा आयुर्वेद को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उनका लक्ष्य आने वाले समय में अधिक से अधिक लोगों तक आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ पहुँचाना और भारतीय आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।

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