ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मण दास महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान की एक गंगा थे प्रेम जब अनंत हो गया तभी मानो रोम रोम संत हो गया श्री महत जय रामदास महाराज हरिद्वार

ब्रह्मपुरी स्थित श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्त ऋषि आश्रम में परम पूज्य गुरुदेव साकेत वासी गुरु भगवान परम पूज्य श्री लक्ष्मण दास महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल संत समागम श्री महंत सूरज दास महाराज की अध्यक्षता में महंत रवि देव महाराज के संचालन में संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए आश्रम के श्रीमहंत जय रामदास महाराज ने कहा प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु भगवान श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान की एक गंगा के रूप में विद्यमान थे उनके द्वारा प्रदत्त किया गया है ज्ञान सदैव हमारे मस्तिष्क पटल में तथा आश्रम में उनके तपोबल के रूप में स्थापित रहेगा प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर श्री बाबा नरसिंह दास दूधाधारी जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य साकेत वासी महामंडलेश्वर श्री लक्ष्मण दास महाराज भक्तों को भजन सत्संग तथा धर्म कर्म के माध्यम से कल्याण का मार्ग दिखाने वाले परम तपस्वी विद्वान संत थे उन्होंने सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य किया सतगुरु मेरे सीताराम सतगुरु ही घनश्याम सतगुरु के चरणों में देखो बसते चारों धाम गुरु चरणों की रज हमारे भाग्य का उदय कर देती है तथा हमारा मानव जीवन सार्थक कर देती है इस अवसर पर बोलते हुए श्रीमहंत सूरज दास महाराज ने कहा परम पूज्य साकेत वासी महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे इस अवसर पर बोलते हुए महंत रवि देव महाराज ने कहा परम पूज्य साकेत वासी लक्ष्मण दास जी महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान की पावन त्रिवेणी थे उनके द्वारा दिया गया ज्ञान भक्तों में सदैव सुख शांति समृद्धि के रूप में विद्यमान रहेगा उनके दिये गये ज्ञान की गंगा सदैव प्रवाहित होती रहेगी इस अवसर पर महंत अर्जुन दास महाराज अहमदाबाद श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज स्वामी सतपाल महाराज महंत कमलेश्वरा नंद महाराज स्वामी शंभू दास महाराज महंत वीरेंद्र स्वरूप महाराज महंत स्वामीनारायण दास महाराज स्वामी नारायण दास महाराज आचार्य निरंज शुक्ला महंत तुलसीदास महाराज महंत रामेश्वर दास महाराज महंत अर्जुन रास महाराज श्री विमल दास महाराज पुजारी दयाराम दास महाराज महंत रामदास महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल रामदास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे सभी ने आयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया तथा बहती ज्ञान की सरिता में स्नान कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया

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