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मनुष्य की हर सांस में हरि का सिमरन होना चाहिए श्री महंत रघुवीर दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदप्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने आज भक्तजनों के बीच हरिद्वार रोड स्थित श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में अत्यंत गूढ़ और प्रेरणादायक उपदेश देते हुए कहा कि मनुष्य का प्रत्येक श्वास भगवान हरि के स्मरण में व्यतीत होना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची भक्ति और आत्मिक शांति का मार्ग है। उन्होंने बताया कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान की शरण में चले जाते हैं, उनका मन सांसारिक भेदभावों से ऊपर उठ जाता है, उन्हें किसी के भले या बुरे से कोई विशेष सरोकार नहीं रह जाता, क्योंकि उनका चित्त केवल प्रभु में लीन हो जाता है। इसके विपरीत जो लोग अभी भी अपने और पराए, अच्छे और बुरे के भेद में उलझे रहते हैं, वे वास्तविक अर्थों में योग साधना के पथ पर अग्रसर नहीं हो पाते और भगवान हरि की प्राप्ति से दूर रह जाते हैं। उन्होंने समझाया कि भगवान को पाने के लिए सबसे पहले मनुष्य को अपने भीतर से ‘मैं’ और ‘मेरा’ के भाव को समाप्त करना होगा तथा सभी के प्रति समान दृष्टि रखनी होगी, तभी उसका मन शुद्ध और निर्मल बन सकेगा। गुरु महाराज ने आगे कहा कि एकाग्रता और एकांतचित्तता साधना की आधारशिला हैं, बिना मन को स्थिर और एक दिशा में केंद्रित किए कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कलियुग का प्रभाव अत्यंत प्रबल है, जिसमें भौतिक सुख-सुविधाएँ, आकर्षण और मोह-माया मनुष्य को बार-बार अपने जाल में फँसाकर उसके मन को चंचल और अशांत बनाए रखते हैं, जिससे वह अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक जाता है। इसलिए यदि कोई साधक वास्तव में भगवान की प्राप्ति चाहता है और इस जन्म को सफल बनाना चाहता है, तो उसे सांसारिक मोह-माया, सुख-सुविधाओं और अनावश्यक साधनों का त्याग करना होगा, अपने और पराए के भेदभाव को छोड़ना होगा और अपने अंतःकरण में उस परम शक्ति, उस सृष्टि के कर्ता भगवान हरि को धारण करते हुए निरंतर उनका स्मरण करना होगा। उन्होंने अंत में कहा कि जब मनुष्य पूर्ण रूप से एकांतचित्त होकर, निर्मल भाव से और अटूट विश्वास के साथ भगवान का चिंतन करता है, तभी उसे सच्चे आनंद, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, और वही उसके जीवन का परम उद्देश्य है। इस पावन अवसर पर श्री महंत बिहारी शरण महाराज महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज महंत जयरामदास महाराज महंत हरेंद्र दास स्वामी अंकित शरण महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगणउपस्थित थे

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