माता सीता जयंती पर गूंजा भक्ति और श्रद्धा का मंगल संदेश हरिद्वार

हरिद्वार रानी गली स्थित आश्रम मेंमाता सीता जयंती के पावन अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भक्तों का अपार जनसमूह उमड़ पड़ा। इस शुभ अवसर पर परम पूज्य महंत प्रहलाद दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से माता सीता के दिव्य चरित्र, त्याग, तपस्या और पतिव्रता धर्म की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।अपने प्रवचन में महाराज जी ने कहा कि माता सीता केवल जनकनंदिनी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण नारी शक्ति, धैर्य, सहनशीलता और मर्यादा की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने बताया कि माता सीता का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म, सत्य और संयम का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।महाराज जी ने कहा कि माता सीता ने अपने जीवन में जितने कष्ट सहे, उतनी ही दृढ़ता और समर्पण के साथ उन्होंने धर्म की रक्षा की। वनवास की कठिनाइयों से लेकर लंका में रावण के बंदीगृह तक, हर परिस्थिति में माता सीता ने अपनी पवित्रता, आत्मबल और विश्वास को अडिग रखा। यही कारण है कि उनका चरित्र युगों-युगों तक मानवता को प्रेरणा देता रहेगाप्रवचन के दौरान महाराज जी ने कहा कि आज के समय में माता सीता के आदर्शों को अपनाने की अत्यंत आवश्यकता है। परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब हम त्याग, प्रेम, सेवा और मर्यादा को अपने जीवन में स्थान दें।भक्तगण माता सीता के भजनों और जयघोषों में भावविभोर दिखाई दिए। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ। कार्यक्रम के अंत में आरती, प्रसाद वितरण एवं भक्तों के कल्याण की मंगलकामना के साथ आयोजन संपन्न हुआ।माता सीता जयंती का यह पावन पर्व भक्तों के लिए आस्था, प्रेरणा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देकर हृदयों में अमिट छाप छोड़ गया।


