श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम तथा बालाजी दरबार सभापुर में प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप श्री महंत श्यामसुंदर जी महाराज के पावन सानिध्य में हनुमान जयंती का पावन उत्सव बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण के साथ मनाया गया।

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम तथा बालाजी दरबार सभापुर में प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप श्री महंत श्यामसुंदर जी महाराज के पावन सानिध्य में हनुमान जयंती का पावन उत्सव बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया, जिससे पूरा धाम आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा। प्रातः काल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान बालाजी के दर्शन हेतु उमड़ पड़ी। भक्तजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ बालाजी महाराज के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते दिखाई दिए।इस अवसर पर भव्य भजन-कीर्तन, सत्संग एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। भजनों की मधुर स्वर लहरियों और “जय श्री राम”, “जय बजरंगबली” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। संत-महात्माओं के श्रीमुख से निकली दिव्य वाणी ने उपस्थित भक्तों के हृदय को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।इस पावन अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप महंत श्यामसुंदर जी महाराज ने कहा कि जो भी भक्त संकटमोचन, कृपा निधान बालाजी भगवान की शरणागत हो जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट, दुख और संकट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान अपने भक्तों की पुकार तुरंत सुनते हैं और उनके जीवन से बाधाओं का नाश कर उन्हें सफलता, सुख और शांति प्रदान करते हैं। महंत जी ने आगे कहा कि जो भक्त सतगुरु द्वारा बताए गए सत्य, सेवा और साधना के मार्ग पर चलता है, उसके मानव जीवन का उद्धार निश्चित हो जाता है तथा उसका लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं।उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि जीवन में सदैव धर्म, भक्ति और गुरु वचनों का पालन करें, क्योंकि यही मार्ग मनुष्य को मोक्ष और परम कल्याण की ओर ले जाता है। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पूरा आयोजन अत्यंत भव्य, दिव्य और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा।

Related Articles

Back to top button