मां चामुंण्डा देवी जाने वाली शोभायात्रा को वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा बिलकेश्वर मंदिर परिसर में रोका भक्तों की भावनाओं से किया खिलवाड़ हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदवर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार चैत्र नवरात्र दुर्गा पूजा मां चामुंडा देवी ललिता तीर्थ स्थित सोनार कोठी शिवालिक वन में मेरु पर्वत पर मां चामुंडा देवी का प्राचीन मंदिर विद्यमान है मां चामुंडा देवी मंदिर में घट स्थापित करने हेतु जाने हेतु भक्तों द्वारा एक शोभा यात्रा पंडित श्री सुनील शर्मा के नेतृत्व में हर की पैड़ी से शुरू हुई और बिल्केश्वर मंदिर पहुंची जहां पर वन विभाग कर्मचारियों द्वारा शोभा यात्रा जो मां चामुंडा देवी कलश लेकर जा रही थी को गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी बीच में रोक दिया जिस पर दोनों पक्षों में गर्मा गर्मी हुई किंतु बाद में वन विभाग के अधिकारियों द्वाराकलश को बिल्केश्वर मंदिर में स्थापित कर दिया गया तथा शोभा यात्रा मां चामुंडा देवी की बीट पीठ पर ही रुकी रही इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश शर्मा योगी सचिन पंडित सुनील शर्मा कोषाध्यक्ष संदीप नाथ पंडित नवीन तोताराम जयकुमार सन्टी अतुल शर्मा रिंकू श्री राम भारद्वाज पंडित सुदामा मारुति दीपक अभिषेक नाथ दुर्गेश नंदिनी बबलू गिरी हिमांशु गिरी पवन कोरी विपुल राजपूत हर्ष शर्मा सौरभ शर्मा अनमोल नाथ सहित भारी संख्या में भक्तजन इस शोभा यात्रा में उपस्थित थे वन विभाग के डिप्टी रेंजर मुंशी रेंजर तथा अनेकों अधिकारी पूरी तथसता के साथ मोर्चे पर मौजूद थेहरिद्वार की पवित्र देवभूमि में नील और बिल्व पर्वत के मध्य मां गंगा की अविरल धारा बहती है। यहाँ मां मनसा देवी और मां चंडी देवी के भव्य स्वरूपों से तो दुनिया परिचित है लेकिन सोनार कोठी जो मनसा देवी पर्वतमाला के पीछे की तरफ स्थित है वहाँ मां चामुंडा देवी सिद्ध पीठ का अपना ही एक रहस्यमयी और अलौकिक आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक संदर्भों और शास्त्रों की महिमा के आधार पर इस सिद्ध पीठ का विस्तारपूर्वक विवरण अत्यंत दिव्य है। हरिद्वार के बिल्व पर्वत के पश्चिमी ढलान पर जिसे स्थानीय लोग सोनार कोठी क्षेत्र कहते हैं मां चामुंडा का यह प्राचीन मंदिर स्थित है। स्कंद पुराण के केदारखंड में हरिद्वार यानी मायापुरी के शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है जिसमें मां चामुंडा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब शुंभ और निशुंभ नामक दैत्यों का अत्याचार बढ़ा तब भगवती कौशिकी के ललाट से एक अत्यंत तेजस्वी देवी प्रकट हुईं जिन्होंने प्रचंड असुरों चण्ड और मुण्ड का संहार किया। मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य में उल्लेख है कि चण्ड और मुण्ड का विनाश करने के कारण ही आप संसार में चामुंडा के नाम से विख्यात हुईं। हरिद्वार का यह क्षेत्र उन्हीं असुरों के वध और देवी की विजय गाथा का साक्षी माना जाता है। सोनार कोठी शब्द का अर्थ स्वर्ण का निवास माना जाता है और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यहाँ ऋषि-मुनि स्वर्ण के समान तेजस्वी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए तपस्या करते थे। यह स्थान घने जंगलों और पर्वतों से घिरा होने के कारण तंत्र साधना और एकांत भक्ति के लिए सर्वोपरी रहा है। हरिद्वार स्थित इस सिद्ध पीठ की महिमा को इस प्रकार समझा जा सकता है कि इसे एक जाग्रत शक्तिपीठ माना जाता है जहाँ भक्त मानते हैं कि मां चामुंडा साक्षात रूप में विराजमान हैं और भक्तों के कष्टों का हरण करती हैं। मनसा देवी पर्वत के पीछे का यह भाग अत्यंत ऊर्जावान माना जाता है और यहाँ की शांति साधकों को शीघ्र ही ध्यान की गहराई में ले जाती है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त गंगा स्नान के पश्चात श्रद्धापूर्वक पर्वत की चढ़ाई कर मां चामुंडा के दर्शन करता है उसे अष्ट सिद्धि और नव निधि की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। जहाँ हरिद्वार के मुख्य मंदिरों में अपार भीड़ होती है वहीं चामुंडा देवी का यह क्षेत्र अपनी शांति और पवित्रता के लिए जाना जाता है। सोनार कोठी की पहाड़ियां औषधीय वनस्पतियों से भरी हैं और यहाँ से हिमालय का विहंगम दृश्य और नीचे बहती गंगा की धारा का सौंदर्य देखते ही बनता है। मां चामुंडा देवी सिद्ध पीठ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था का वह केंद्र है जहाँ मनुष्य अपनी तामसिक प्रवृत्तियों यानी चण्ड-मुण्ड रूपी अहंकार और क्रोध को त्यागकर सात्विकता की ओर बढ़ता है। हरिद्वार की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि इस प्राचीन और पौराणिक सिद्ध पीठ की दिव्यता का अनुभव न किया जाए। जय मां चामुंडा। इस प्रकार मां चामुंडा देवी की बार-बार शोभायात्रा को रोका जाना सनातन पर प्रहार है जिस देश में और प्रदेश में हिंदुत्व का डंका पीटने वाली बीजेपी की सरकार हो वहां ऐसा कु कृत्य बार-बार होना हिंदुत्व पर प्रहार है

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