गुरु इस संसार में साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति के रूप में अवतरित होते हैं महामंडलेश्वर संजय गिरी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदगुरु इस संसार में साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति के रूप में अवतरित होते हैं, जो जीव को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान, भक्ति और सत्य के प्रकाश की ओर अग्रसर करते हैं। उनके श्री चरणों में चारों धामों का वास माना गया है, क्योंकि वहीं से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। गुरु का सान्निध्य केवल जीवन को दिशा देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व को पवित्र और सार्थक बना देता है। उनकी वाणी में ऐसी दिव्यता और शक्ति होती है, जो भ्रमित मन को स्थिर कर देती है, हृदय में श्रद्धा और विश्वास का संचार करती है और जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।जब साधक पूर्ण समर्पण भाव से गुरु के चरणों में अपना अहंकार त्याग देता है, तब गुरु कृपा से उसके जीवन के सभी संकट, बाधाएँ और कष्ट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। गुरु अपने शिष्य को न केवल सांसारिक कर्तव्यों का बोध कराते हैं, बल्कि उसे आत्मज्ञान की उस ऊँचाई तक पहुँचाते हैं जहाँ से जीवन का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होने लगता है। वास्तव में गुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात शिव स्वरूप हैं, जो करुणा, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय संगम के रूप में अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। उनकी कृपा दृष्टि मात्र से ही साधक के भीतर छिपी दिव्यता जागृत हो जाती है और वह जीवन के परम लक्ष्य — मोक्ष — की ओर अग्रसर हो जाता है।यही दिव्य और प्रेरणादायी उद्गार सद्गुरु आश्रम कांगड़ी में अपने श्री मुख से जुना अखाड़े के महामंडलेश्वर, प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान संजय गिरी जी महाराज ने भक्तजनों के बीच व्यक्त किए। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि गुरु भक्ति के बिना जीवन अधूरा है और सच्ची श्रद्धा व समर्पण के साथ गुरु के मार्ग का अनुसरण करने से ही मनुष्य का जीवन सफल और धन्य बन सकता है।

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