हरिद्वार में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की १६५वीं जयंती

हरिद्वार प्रवेश पत्र का ठाकुर मनोज मनोजानंद भेल सेक्टर-४ स्थित सामुदायिक केंद्र में विश्वकवि, महान साहित्यकार, दार्शनिक एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की १६५वीं जयंती बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर गुरुदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया तथा उनके राष्ट्रप्रेम, साहित्य-साधना और मानवीय मूल्यों को स्मरण किया गया।इस अवसर पर अध्यक्ष डॉक्टर कृष्णेंदु डे ने अपने पावन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर भारतीय संस्कृति के ऐसे अमर प्रकाश स्तंभ हैं, जिनकी रचनाएँ आज भी समाज को ज्ञान और संवेदना का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन हमें सत्य, प्रेम और मानवता की प्रेरणा देता है।उपाध्यक्ष तरुण मंडल एवं उपाध्यक्ष सिमरन दास ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी लेखनी से पूरे विश्व में भारत की सांस्कृतिक चेतना का गौरव बढ़ाया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, प्रकृति-प्रेम और मानव कल्याण की अद्भुत भावना समाहित है।महामंत्री सुमन बनर्जी ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा नीति और विचारधारा आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने युवाओं से गुरुदेव के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।कोषाध्यक्ष अविक डे सरकार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला अमूल्य खजाना है। उनके विचार मानवता की सेवा और समाज के उत्थान का संदेश देते हैं। इस अवसर पर कक्षा दसवीं की परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव शिबू मंडल, सांस्कृतिक सचिव सुमन दास, श्याम दास चटर्जी, अशोक राय, विमानी मेथी, सुब्र प्रकाश भट्टाचार्य, संजय रतन दास सहित बंगो संस्कृति मंच एवं अन्य गणमान्य कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के आदर्शों पर चलने तथा भारतीय संस्कृति, साहित्य और शिक्षा के संरक्षण का संकल्प लेकर किया गया।

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