सद्गुरु के पावन वचनों से मानव जीवन धन्य और सार्थक हो जाता है महंत श्यामसुंदर महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद हरि भक्ति और सत्संग मनुष्य जीवन की वह अमूल्य निधि है, जो जीवन की दिशा और दशा दोनों को परिवर्तित कर देती है। जब किसी साधक को ऐसे सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त होता है, जिनके पावन वचन जीवन की काया पलट कर दें, तो उसका मानव जीवन वास्तव में धन्य और सार्थक बन जाता है। ऐसे ही अमृतमयी वचनों से भक्तजनों का मार्गदर्शन करते हुए श्री श्याम वैकुंठ धाम श्यामपुर हरिद्वारके श्री महंत श्याम सुंदर दास जी महाराज ने भक्तों के मध्य सत्संग में दिव्य उपदेश प्रदान किए।उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह केवल भोग-विलास के लिए नहीं, अपितु प्रभु भक्ति, सत्कर्म और आत्मकल्याण के लिए प्राप्त हुआ है। यदि इस जीवन में सद्गुरु की कृपा और प्रभु का स्मरण मिल जाए, तो जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को परम शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा—“गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष।गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष॥”महाराज श्री ने कहा कि सद्गुरु वह दिव्य शक्ति हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनके श्रीमुख से निकले वचन मनुष्य के जीवन को नई दिशा देते हैं और उसे धर्म, भक्ति तथा सत्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैंभगवान श्रीहरि की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा— “हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥” अर्थात भगवान की महिमा अनंत है और उनकी कथा भी अनंत है, जिसे संतजन विविध प्रकार से कहते और सुनते हैं। श्रीहरि की भक्ति में ही जीवन का वास्तविक आनंद और कल्याण निहित है।सत्संग में उपस्थित भक्तजन गुरु महाराज के श्रीमुख से निकले अमृतमयी वचनों को सुनकर भावविभोर हो उठे। संपूर्ण वातावरण हरिनाम संकीर्तन और भक्ति रस से ओतप्रोत हो गया। अंत में सभी भक्तों ने गुरु चरणों में प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जीवन में सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।



