हरिद्वार में श्री भोलानंद संन्यास आश्रम में विशाल संत भंडारा आयोजितमहामंडलेश्वर 1008 स्वामी तेजशानंद गिरी जी महाराज ने गुरु महिमा पर दिए ओजस्वी विचार

हरिद्वार, 16 अप्रैल वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। धर्मनगरी हरिद्वार के प्रसिद्ध श्री भोलानंद संन्यास आश्रम में आज प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री भोलानंद जी महाराज की असीम कृपा से एक विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर 1008 स्वामी तेजशानंद गिरी जी महाराज के दिव्य सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं भक्तजनों ने सहभागिता की।

आश्रम परिसर सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना से गुंजायमान रहा। संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक दिव्य बना दिया। इस अवसर पर संतों का सम्मान, गुरु पूजन तथा प्रसाद वितरण श्रद्धाभाव के साथ संपन्न हुआ।सभा को संबोधित करते हुए ज्ञानमूर्ति महामंडलेश्वर 1008 स्वामी तेजशानंद गिरी जी महाराज ने गुरु महिमा पर अत्यंत प्रेरणादायक एवं ओजस्वी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति होते हैं। गुरु ही जीव को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, ज्ञान और मोक्ष के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने अपने उद्बोधन में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान स्वामी भोलानंद जी महाराज के तप, त्याग, सेवा और साधना से परिपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन मानव कल्याण और सनातन धर्म की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित रहा। ऐसे महान संत विरले ही इस धरती पर अवतरित होते हैं, जिनकी कृपा से भक्तों का जीवन धन्य हो जाता है।महामंडलेश्वर स्वामी तेजशानंद गिरी जी महाराज ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और गुरु के बिना आत्मकल्याण का मार्ग संभव नहीं है। उनके प्रेरणादायक विचारों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कार्यक्रम के अंत में विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संतों, महात्माओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरा आश्रम परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। इस अवसर पर सचिव श्री राजगिरी महाराज महंत रवि देव महाराज महंत काठिया बाबा महंत सूरज दास महाराज महंत कमलेशानंद सरस्वती सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे

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