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भगवान श्री राम की महिमा उनके नाम में छिपी है जो समझ गया वह भव सागर पर हो गया महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद सप्त सरोवर रोड स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान गुफा में गूंजे ये उद्गार वास्तव में अध्यात्म का निचोड़ हैं। यहाँ इस विषय पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है: राम नाम: भवसागर से मुक्ति की नौका और जीवन की सार्थकता भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में ‘राम’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि वह परम चेतना है जो रोम-रोम में रमी हुई है। सप्त सरोवर रोड स्थित श्री हनुमान गुफा के पावन सान्निध्य में महामंडलेश्वर स्वामी श्याम दास जी महाराज ने जो सत्य उद्घाटित किया, वह करोड़ों भक्तों के विश्वास की नींव है— “राम का नाम भवसागर की ओर जाने वाली नैया है।” भवसागर की वैतरणी है राम नाम संसार को एक ‘भवसागर’ कहा गया है, जहाँ मोह, माया, लोभ और क्रोध की प्रचंड लहरें मनुष्य को निरंतर डुबोने का प्रयास करती हैं। इस अशांत समुद्र को पार करना मानवीय शक्ति के परे है। ऐसे में ‘राम नाम’ उस सुदृढ़ नौका के समान है, जो बिना किसी शुल्क के जीव को कुशलतापूर्वक दूसरे किनारे यानी मोक्ष तक पहुँचा देती है। महाराज जी के अनुसार, जिस प्रकार हनुमान जी ने राम नाम के सहारे समुद्र लांघ लिया था, उसी प्रकार एक साधारण मनुष्य भी इस नाम को जपकर जीवन की जटिलताओं को पार कर सकता है। मानव जीवन की सार्थकता हमारा यह शरीर और जीवन अनमोल है, लेकिन इसकी सार्थकता केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं है। महाराज जी ने स्पष्ट किया कि: आंतरिक शुद्धि: राम नाम के जप से अंतःकरण निर्मल होता है। सत्य की राह: यह नाम हमें अधर्म से हटाकर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। संतोष का संचार: जहाँ ‘राम’ हैं, वहाँ पूर्णता है। जब मनुष्य राम नाम को अपने जीवन का आधार बना लेता है, तो उसकी व्यर्थ की दौड़ समाप्त हो जाती है और जीवन सार्थक हो जाता है। इहलोक और परलोक का सुधार अक्सर मनुष्य केवल वर्तमान (इहलोक) की चिंता करता है, परंतु सनातन दृष्टि भविष्य (परलोक) की भी चिंता करती है। इस लोक में: राम नाम जपने वाला व्यक्ति मानसिक शांति, धैर्य और नैतिकता प्राप्त करता है। उसके कर्म सुधरते हैं, जिससे उसका सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन सुखमय होता है। उस लोक में: हमारे शास्त्र कहते हैं कि अंत समय में लिया गया राम का नाम जीवात्मा के कष्टों को हर लेता है और उसे सद्गति प्रदान करता है। महाराज जी के शब्दों में, यह नाम वह ‘पाथेय’ (रास्ते का भोजन) है जो परलोक की यात्रा को सुगम बना देता है। हनुमान गुफा की महिमा और भक्ति का केंद्र हरिद्वार की पावन धरा और उस पर श्री हनुमान गुफा जैसा सिद्ध स्थान—जहाँ स्वयं महाबली हनुमान की ऊर्जा विद्यमान है—वहाँ से निकले ये वचन विशेष महत्व रखते हैं। हनुमान जी स्वयं राम नाम के सबसे बड़े उपासक हैं। महाराज जी ने भक्तों को यही संदेश दिया कि यदि जीवन की नैया को डूबने से बचाना है, तो उसे ‘राम’ रूपी खेवनहार के सुपुर्द कर देना चाहिए। महामंडलेश्वर श्री श्याम दास जी महाराज का यह प्रवचन हमें याद दिलाता है कि कलियुग में नाम की महिमा ही सर्वोपरि है। “राम” केवल दो अक्षरों का मेल नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की वह ऊर्जा है जो शून्य से शिखर तक व्याप्त है। यदि हम अपने दैनिक जीवन में राम नाम को आत्मसात कर लें, तो न केवल हमारा आचरण शुद्ध होगा, बल्कि हम उस परम आनंद को भी प्राप्त कर सकेंगे जिसके लिए यह मानव देह प्राप्त हुई है “राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस। बरषत बारिद बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥” (बिना राम नाम के सहारे के परमार्थ की आशा करना वैसा ही है, जैसे वर्षा की बूंदों को पकड़कर आकाश पर चढ़ने की कोशिश करना।)

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