संत महापुरुषों का जीवन भक्तों तथा समाज को समर्पित होता है संत समाज का सबसे बड़ा पथ दर्शक होता है श्री महंत स्वामी प्रेमानंद महाराज हरिद्वार

हरिद्वार 6 अक्टूबर 2025 बसंत गली स्थित तीर्थ कुटीर आश्रम में परम पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर स्वामी गंगेश्वरानन्द जी महाराज ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी तीर्थानन्द जी महाराज ब्रह्मलीन स्वामी सर्वज्ञा मुनि जी महाराज ब्रह्मलीन स्वामी गोपाल मुनि महाराज एवं शांति माताजी ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर सर्व दर्शनाचार्य जी महाराज की पावन स्मृति में एक विशाल संत समागम परम पूज्य गुरुदेव श्री महंत स्वामी प्रेमानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत स्वामी प्रेमानंद जी महाराज ने संत महापुरुषों का जीवन समाज को समर्पित होता है संत महापुरुष भक्तों को तथा समाज को सही मार्ग प्रदर्शित करते हैं संत संपूर्ण समाज का पथदर्शक होता है समाज को सही मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कल्याण का मार्ग दिखाया महंत स्वामी प्रेमानंद महाराज महाराज ने शरद पूर्णिमा पर्व पर जानकारी देते हुए बताया
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो हिंदी कैलेंडर के आश्विन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर कजरी पूर्णिमा या कुजरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दृष्टि से भी अपने आप में विशेष स्थान रखता है।
धार्मिक महत्त्व
शरद पूर्णिमा को भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की लीला से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है और इसे पीने या उससे भोजन बनाने से स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है। इस दिन रात्रि में भगवान श्री कृष्ण और राधा की रात्री लीला का स्मरण किया जाता है।
इस अवसर पर लोग चाँद की रोशनी में रात भर जागरण, भजन-कीर्तन और पूजा करते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पवित्रता, आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का दिन माना जाता है।
सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलू
शरद पूर्णिमा को कई राज्यों में अपनी विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाता है। खासकर बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन किशोरियों और महिलाओं द्वारा झूले का आयोजन, मधु से बनी खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।
शरद पूर्णिमा पर चाँद की रोशनी में रखा गया भोजन जैसे खीर या दूध, जिसे रास खीर कहा जाता है, खास महत्व रखता है। इसे चाँद की किरणों के सम्पर्क में रखने से यह स्वास्थ्यवर्धक और पोषक माना जाता है।
सामाजिक महत्त्व
यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि समाजिक मेल-जोल का भी अवसर है। परिवार और मित्रजन एक साथ मिलकर पूजा, भोजन और उत्सव का आनंद लेते हैं। यह भाईचारा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का भी माध्यम है।बच्चों और युवाओं में यह दिन संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान और आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देता है।
स्वास्थ्य और प्राकृतिक दृष्टि
शरद पूर्णिमा शरद ऋतु के आरंभ में आती है, जब मौसम ठंडा और सुखद होता है। पारंपरिक मान्यता है कि इस दिन का दूध और खीर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय और हड्डियों के लिए लाभकारी होता है। चंद्रमा की रात्री किरणों के कारण इसे अमृत तत्व युक्त माना जाता है।
शरद पूर्णिमा का महत्त्व केवल धार्मिक या आध्यात्मिक नहीं है, बल्कि यह संस्कार, स्वास्थ्य, सामाजिक संबंध और प्रकृति के साथ तालमेल का प्रतीक है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सांस्कृतिक परंपराओं का पालन, परिवार और समाज में प्रेम और एकता बनाए रखना, तथा प्रकृति के चक्र को समझना हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है इस अवसर पर बोलते हुए महंत सूर्यांश मुनि महाराज ने कहा गुरु ज्ञान का वह सागर है जिनके ज्ञान की गंगा में गोते लगाने से जीवन धन्य तथा कृतार्थ हो जाता है इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर सुरेश मुनि जी महाराज ने कहा वे लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं जो गुरु की शरणागत होते हैं गुरु उन्हें उंगली पड़कर भवसागर पार करा देते हैं महंत कोठारी राघवेंद्र दास महाराज ने कहा जीवन सिर्फ भगवान का भजन करने से ही सार्थक हो सकता है और यह मार्ग हमें गुरु चरणों से प्राप्त होता है इस अवसर पर एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें महंत हरिदास महाराज महंत केशवानंद महाराज स्वामी नरोत्तमा नंद महाराज महंत सूरज दास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज श्याम गिरी महाराज देहरादूनी बाबा रमेशानंद महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे


