भगवान की भक्ति से ही मानव जीवन सार्थक हो सकता है महंत रविदेव महाराजर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदभक्तजनों के मध्य अपने पावन वचनों से भक्ति, समर्पण और वैराग्य का दिव्य संदेश देते हुए प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान वेदांताचार्यश्री महंत रवि देव महाराज ने कहा कि जिसके मन में भगवान की सच्ची भक्ति वास कर जाती है, उसका सांसारिक मोह-माया, बंधनों और विषय-विकारों से स्वतः ही संबंध समाप्त होने लगता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है और निरंतर उनका स्मरण करता है, तब उसका जीवन केवल सांसारिकता तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि वह आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।गरीबदास सेवा आश्रम में आयोजित सत्संग एवं प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान का सिमरन ही मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी साधना है। संसार के सभी संबंध, सुख और संपत्ति क्षणभंगुर हैं, किंतु प्रभु की भक्ति शाश्वत है। जो व्यक्ति भगवान की शरण में आ जाता है, उसका जीवन पवित्र, सफल और सार्थक बन जाता है।उन्होंने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक क्षण प्रभु स्मरण, सेवा, सत्संग और सद्कर्मों में लगाना चाहिए, क्योंकि यही जीवन की सच्ची पूंजी है। जब हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित होता है, तब अज्ञान का अंधकार मिट जाता है और आत्मा परमात्मा से जुड़ने लगती है।महाराज श्री ने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि भगवान की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार, विचार और कर्मों में भी प्रभु के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। भक्ति मनुष्य को विनम्रता, करुणा, प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाती है।प्रवचन के दौरान उपस्थित भक्तजन भावविभोर होकर प्रभु नाम के संकीर्तन में लीन दिखाई दिए। पूरा आश्रम भक्ति रस, दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के पावन वचनों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।अंत में महाराज श्री ने सभी भक्तों से आह्वान किया कि जीवन की भागदौड़ और संघर्षों के बीच भी प्रभु का स्मरण कभी न छोड़ें, क्योंकि भगवान की शरण ही वह आश्रय है, जहाँ से जीवन को सच्ची शांति, आनंद और मुक्ति प्राप्त होती है।

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